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सरकार से कोई सहायता न मिलने के बावजूद इस महिला ने कामयाबी के झंडे गाड़े हैं

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8:58 pm 10 Apr, 2018

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इस बात में कोई गणित या विज्ञान लगाने की जरूरत नहीं है कि हमारे देश में जो दर्जा क्रिकेट को मिला हुआ है, वह किसी और खेल को नहीं मिला है। धीरे-धीरे स्थितियां सुधर तो रही हैं, लेकिन अभी मंजिल बहुत दूर ही नजर आती है। खिलाड़ियों के उत्थान की बात तो की जाती है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

 

आज हम आपको ऐसी महिला एथलीट के बारे में  बताने जा रहे हैं, जिन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और स्वर्ण पदक भी जीते हैं। हालांकि, मैदान पर सफलता के बावजूद वह आज चाय बेचकर अपने परिवार का गुजारा करने को मजबूर हैं।

 

 

तमिलनाडु की 45 वर्षीय महिला एथलीट कलाईमणि की शादी 20 साल की उम्र में कर दी गई थी। दसवीं कक्षा तक पढ़ी कलाईमणि स्कूल के दिनों से ही एथलेटिक्स और कबड्डी की प्रतियोगिताओं में भाग लिया करती थी। तीन बच्चों की मां कलाईमणि ने शादी के बाद अपने पति के साथ चाय के स्टॉल पर बैठना शुरू कर दिया। इस चाय के स्टॉल से उन्हें दिन के 400 रुपए से लेकर 500 रुपए तक की कमाई ही हो पाती है।

 

शादी के बाद कलाईमणि ने खेल के प्रति अपनी रूचि के बारे अपने पति को बताया और कहा कि वह अपना खेल जारी रखना चाहती हैं। इस पर उनके पति ने भी उनका साथ दिया और 10 साल पहले मास्टर्स एथलेटिक चैंपियनशिप के बारे में बताया।

 

 

जोसेफ़ नाम के एक ट्रेनर ने कलाईमणि को ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।  उन्होंने  ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने चार स्वर्ण पदक अपने नाम किए। कलाईमणि बताती हैंः


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“नेशनल इवेंट्स में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने कई बैंकों के चक्कर काटे लेकिन सभी बैंकों ने उन्हें लोन देने से मना कर दिया। अंत में उन्होंने अपने दोस्तों की मदद ली।”

 

 

अब सरकार से कोई सहायता न मिलने के बावजूद भी कलाईमणि फोनेक्स रनर्स टीम के साथ 41 किलोमीटर की मैराथन दौड़ प्रतिस्पर्धा में हिस्सा ले रही हैं। इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही हैं। वह रोज सुबह उठकर कसरत करती हैं और 21 किलोमीटर दौड़ लगाती है। उनका कहना हैः

 

“मुझे सरकार की तरफ से किसी तरह का सहयोग नहीं मिला है। मैं अपनी इस छोटी सी चाय की दुकान से कमाए हुए दैनिक 400 से 500 रुपयों की सहायता से अपने परिवार और खेल की जरूरतों को पूरा करती हूं।”

 

 

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