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पश्चिम के इन तौर-तरीकों को हमने बिना सोचे-समझे ही अपना लिया

1:57 pm 17 May, 2018

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हमारा समाज पश्चिमी सभ्यता के जाल में इस कदर फंस चुका है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति को पूरी तरह भूला चुकी है। इसमें कोई शक नहीं कि पश्चिमी संस्कृति ने हमारे मूल्यों को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन इसमें दोष हमारा ही है। हमने ही पाश्चात्य संस्कृति को खुद पर हावी होने दिया। बिना सोचे-समझे हमने विदेशी संस्कृति के कुछ ऐसे तौर-तरीके सीख लिए, जिन्हें यहां लागू करने का कोई तर्क नहीं है।

 

सूट पहनना

 

बदलते दौर के साथ भारतीय परिधानों ने अपना रंग रूप बदल लिया है। भारत में कपड़ों की बात आते ही उनके महंगे और ब्रांडेड होने पर जोर दिया जाता है। हमने अपने प्राचीन परिधान को छोड़ विदेशी पहनावे को झट अपना लिया। इसका एक प्रमुख उदाहरण सूट और टाई है, जिसे अक्सर औपचारिक मौकों पर पहना जाता है। पश्चिमी सभ्यता  में इस वेशभूषा को महत्व इसलिए दिया गया, क्योंकि उनके देश ठंडे हैं, जहां सूट और टाई उन्हें ठंड के प्रकोप से बचाता है। अपने देश का वातावरण पश्चिम से खास अलग है।

 

 

कॉनवोकेशन की ड्रेस

 

आपने भी कभी ग्रेजुएशन समाप्त होने के बाद कॉनवोकेशन  के दौरान इस तरह की ड्रेस पहनी होगी, लेकिन हममे से अधिकतर लोग इस बात से अनजान हैं कि इस अवसर पर हम इस तरह की टोपी और काला कोर्ट क्यों पहनते हैं। दरअसल, ये भी पश्चिमी सभ्यता की नकल है।

 

 

ग्लास बिल्डिंग्स

 

पश्चिम की नकल कर हमने ऐतिहासिक इमारतों की जगह ग्लास बिल्डिंग्स खड़ी कर दी हैं। हमारे देश में इस तरह की इमारतों की जरुरत ही नहीं है। विदेशों में इस तरह की बिल्डिंग्स को बनाना इस लिए व्यावहारिक है, क्योंकि वहां मौसम ठंडा होता है, लिहाजा कांच पर सूरज की  किरणों से इमारत को गर्माहट मिलती है। यकीनन हमने अपनी पुरानी घरोहरों से कुछ नहीं सीखा, बस पश्चिम की नकल करते चले गए।

 

 

लो वेस्ट जीन्स

 

भारत में अबतक जीन्स के साथ कई प्रयोग हो चुके है। लो वेस्ट जीन्स का चलन भी विदेशों से ही आया। इन दिनों जीन्स के साथ कई और नए प्रयोग किए जा रहे है। बाजार में लॉन्ग वेस्ट जीन्स, फेडेट और रिप्ड वर्जन की जीन्स भी आ चुकी हैं।

 

 

भारतीय मुद्रा में ‘बक’ का प्रयोग


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भारतीय मुद्रा को रुपया कहा जाता है, लेकिन यहां भी हम नकल करने से पीछे नहीं हटे। हमने रुपये को ‘बक’ नाम दे दिया, जबकि डॉलर के लिए इस शब्द का इस्तेमाल अमेरिका में किया जाता है।

 

 

छुरी-कांटे  का प्रयोग

 

भारत में भले ही आप घर में हाथों से खाना खाना पसंद करते हों लेकिन जब आप किसी औपचारिक लंच पर बैठे होते हैं तो आपसे ये अपेक्षा की जाती है कि आपको छुरी-कांटे  का प्रयोग करना आता हो। भला भारतीय खाने में पश्चिमी तौर तरीकों को क्यों शामिल किया गया ?

 

 

चेहरे पर केक

 

अक्सर आपने जन्मदिन के मौके पर लोगों को मुंह पर केक मलते देखा होगा। कैसी  विडम्बना है इस देश में जहां हर रोज कई लोग भूखे सोते हैं। वहां हम पश्चिमी तौर तरीके से खुशी मानकर इस तरह खाने की बर्बादी कर रहे हैं।

 

 

गैजेटेड ऑफिसर के हस्ताक्षर

 

आपको अक्सर ये कहा जाता होगा कि अपने दस्तावेजों को गैजेटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाएं। भारत में ब्रिटिश राज के समय गैजेटेड ऑफिसर के हस्ताक्षर इसलिए करवाए जाते थे, क्योंकि अग्रेज भारतीयों पर विश्वास नहीं करते थे। लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी ये जारी है।

 

 

वैलन्टाइन डे

 

भारत में वैलन्टाइन डे की खुमारी हर साल सिर चढ़कर बोलती है। फरवरी महीना शुरू होते ही इस दिन का बुखार चढ़ने लगता है। भारतीय सभ्यता में वैलेन्टाइन का जिक्र कहीं नहीं आता, बावजूद इसके युवाओं की दीवानगी इस दिन के लिए देखते ही बनती है।

 

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