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वेद-पुराण और विज्ञान में हैं कुछ आश्चर्यजनक समानताएं, जान कर हैरत में पड़ जाएंगे आप

3:25 pm 17 May, 2018

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आज हममें से अधिकतर लोग वेदों के अनंत विज्ञान भंडार से अनभिज्ञ  हैं। इसमें कोई शक नहीं है किपश्चिमी विज्ञान के अभूतपूर्व अविष्कारों से हम सभी लाभान्वित हुए हैं, लेकिन हमारे वेद-पुराणों  में पहले से ही कई ऐसी तकनीकी चमत्कारों का जिक्र है, जिनकी खोज आज भी वैज्ञानिक कर रहे हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक सृष्टि में जो हो रहा है, वो वेदों के अनुसार है।

एक आम इन्सान के लिए वेद के ज्ञान को समझ पाना कठिन था, इसलिए रोचक कथाओं के माध्यम से वेद के ज्ञान की जानकारी दी गई।आधुनिक विज्ञान  की खोज अनादि काल से ही वेदों में उपलब्ध है। हमने अपने ज्ञान और सभ्यताओं को विज्ञान की दृष्टि से कभी देखा ही नहीं। मिसाल के तौर पर, वैज्ञानिकों ने जिस हिंग्स बोसोन से मिलते-जुलते कण की खोज का दावा किया है, उस बिग बैंग सिद्धांत का सबसे पहला जिक्र वेदों में  ही आता है।  सृष्टि के सृजन की शुरुआत  के साथ-साथ कई अन्य आश्चर्यचकित करने वाली घटनाओं का वर्णन वेदों में है।

 

                                                    सरोगेसी

भ्रूण को एक गर्भ से दूसरे गर्भ में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को सरोगेसी कहते है। भगवत गीता में एक ऐसी घटना का वर्णन है जिसमें इस तकनीक का जिक्र आता है। जब वासुदेव की पत्नी देवकी के सभी पहले छह भ्रूणों को कंस ने मार डाला था, तब सातवीं गर्भावस्था के समय भगवान विष्णु ने देवकी के भ्रूण को योगमाया की मदद से वासुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया था। शेषनाग के इस अवतार को श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के नाम से जाना जाता है।

 

 

                                                      मानव क्लोनिंग

 

महाभारत में इस बात का वर्णन है कि गांधारी 2 साल तक बच्चे को जन्म नहीं दे सकी थीं, जिसके बाद उन्होंने आवेश में आकर अपने गर्भ को पीटना शुरू कर दिया। पागलपन में इस तरह गर्भ को पीटने के कारण गांधारी ने मांस के लोथड़े जन्म दिया। इसके बाद महर्षि व्यास को बुलाया गया। महर्षि व्यास ने इस लोथड़े के 101 टुकड़े कर उन्हे घी के डिब्बों में डाल दिया। महर्षि व्यास को आधुनिक तकनीक का ज्ञान था जिससे उन्होंने इन-वेटरो-फेर्टिलाइजेशन के जरिए 101 बच्चों को जन्म दिया। आज विज्ञान इस तकनीक को मानव क्लोनिंग कहता है।

 


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                                             जेनो-ट्रांसप्लॉन्टेशन

पुराणों मे जिक्र है कि बाल गणेश गजमुख कैसे बने। विज्ञान आज इस तकनीक को जेनो-ट्रांसप्लॉन्टेशन का नाम दे चुका है, जिसमें एक प्रजाति के अंग को दूसरी प्रजाति में प्रत्यारोपित किया जाता है।

 

                                                   

                                               सेल रीजनरेशन

 

हमारी पौराणिक कथाओं में ऐसी कई कहानियों का उल्लेख है, जिनमें देवता और राक्षस अपने शरीर के अंगों को पुन: विकसित कर लिया करते थे। आज वैज्ञानिक मनुष्यों, जानवरों और पौधों में कोशिकाओं को पुन: उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।

 

                                                     ब्रेन सर्जरी

 

सिर में फ्रैक्चर हड्डी के क्षतिग्रस्त टुकड़ों को खोपड़ी में छेद कर निकालने का अभ्यास भारत में कांस्य युग में किया जाता था। वैज्ञानिकों ने हाल ही में खोपड़ी की चोट की सफल सर्जरी के सबसे पुराने मामले की खोज की है।

 

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