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शिलांग के इस जंगल से जुड़ी हैं कई रोचक बातें, घुसने के लिए लेनी होती है देवता की मंजूरी!

5:12 pm 24 Aug, 2018

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कहानियों या टीवी धारावाहिकों में ऐसे पात्र मिल जाते हैं, जिनका किसी जंगल, नदी या पहाड़ पर अधिकार होता है, जो किसी खास स्थल के देवता कहलाते हैं। महाभारत से लेकर रामायण में ऐसे पात्रों के बारे में आपने सुना भी होगा। आज हम आपको एक ऐसे जंगल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं।

 

मेघालय की राजधानी शिलांग के इस जंगल पर देवता का राज है!

 

 

समुद्र तट से 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस शहर में प्राकृतिक छटा देखने लायक है। यहां जंगल, पहाड़, खूबसूरत झील, झरने और बर्फ से ढकी पहाड़ियां हैं। यही कारण है इसे पूर्वी भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। यहां मावफ्लांग जंगल (Mawphlang forest) से जुड़ा एक किस्सा बेहद प्रचलित है।

 

 

इस जंगल को वहां बेहद पवित्र माना जाता है। कहा जाता है कि खासी जनजाति के देवता लबासा इसमें रहते हैं। देवता की आज्ञा के बिना जंगल से कोई भी कुछ बाहर नहीं ले जा सकता।

 

इससे जुड़ी कई बातें वहां के लोग बताते हैं, जो न केवल रोचक हैं, बल्कि अविश्वसनीय भी है। आप इसे अंधविश्वास से भी जोड़ सकते हैं, लेकिन स्थानीय लोग इसे सच मानते हैं।


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स्थानीय निवासी बाबियंग वर्जरी बताते हैं-

 

“700-800 साल पहले इस जंगल पर ब्लाह जनजाति का आधिपत्य था। वे जब इस जंगल को संभालने में असमर्थ हो गए तो उन्होंने इसका जिम्मा लिनदोह जनजाति की एक महिला के बेटे को दिया। तभी से इस जनजाति के लोग इसकी रक्षा कर रहे हैं। इस जंगल में रहने वाले देवता पर उनकी पूरी आस्था है।”

 

 

ये भी बताया जाता है कि एक बार भारतीय सैनिक यहां से सूखे पेड़ों को काटकर ले जा रहे थे तो ये देवता को रास नहीं आया। सेना का ट्रक ही खराब हो गया और उन्हें निराशा हाथ लगी। सैनिकों को यहां से खाली हाथ लौटना पड़ा। इस जंगल का प्रवेश द्वार टहनियों से बने टनल जैसा दिखता है।

 

 

ये वन क्षेत्र अनेक औषधियों से भरा-पड़ा है और यहां बिना गाइड को साथ लिए जाना मना है। बताते चलें कि वन देवता पर आस्था का एक कारण यह भी है कि यहां विचित्र घटनाएं होती रहती है। लिहाजा जनजाति के लोग वन देवता को खुश करने के लिए भेड़-बकरी की बलि भी देते हैं।

 

शिलांग जाना हो तो इस जंगल का भ्रमण जरूर करें!

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