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हिमाचल के आखिरी छोड़ पर बसा यह गांव इन दिनों भुखमरी की कगार पर है

1:58 pm 27 Jul, 2018

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भारत पर प्रकृति बेहद मेहरबान रही है और यही कारण है कि यहां वह सभी रूपों में मौजूद है। वन, पहाड़, समुद्र, रेगिस्तान, मैदान क्या नहीं है यहां। सबकुछ है। लिहाजा चुनौतियां भी कम नहीं हैं यहां। प्राकृतिक आपदाओं से भारत को सबसे ज्यादा लड़ना पड़ता है। फिलहाल, यहां का एक गांव प्रकृति की मार झेल रहा है जो कि हिमाचल की वादियों में स्थित है।

 

 

कांगड़ा जिले के बैजनाथ कसबे में स्थित दूरवर्ती गांव बड़ा भंगाल भूस्खलन के कारण शेष भारत से पूरी तरह कट गया है। लिहाजा, रावी नदी के तट पर बसा यह गांव अकाल की स्थिति से गुजर रहा है। गौरतलब है कि इस गांव तक पहुंचने के लिए कोई भी सड़क नहीं है। वैसे भी ये गांव 6 महीनों तक बर्फ़ गिरने के कारण बाकी हिस्सों से कट जाता है, लेकिन असमय भूस्खलन ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

 

 

बताया जा रहा है कि इस गांव में एक ही सेटलाइट फोन मौजूद है। इस आपदा के कारण गांव के 400 चरवाहों सहित उनके मवेशियों जीवन संकट में है। गांव में जो राशन मौजूद है वह एक महीने भी नहीं चल पाएगा। वहीं, भेड़ों को खिलाने के लिए नमक का भी टोटा हो गया है। लगातार बारिश और भूस्खलन से तबाही की कगार पर पहुंच चुके इस गांव को लेकर जल्द कोई एक्शन नहीं लिया गया तो बड़ा भंगाल गांव पूरी तरह से अकालग्रस्त घोषित हो जाएगा।

 


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बैजनाथ के एसडीएम विकास शुक्ला का कहना हैः

“गांव की प्राकृतिक स्थिति बेहद मुश्किल भरी है। यहां आने-जाने को जिस सड़क का निर्माण होना है वह जंगल का इलाका पड़ता है। इस कार्य के लिए बहुत अधिक धन की ज़रूरत होगी। बचाव के उपाय पर सोचा जा रहा है।”

 

 

इस गांव के लोगों को बचाने के लिए अब हेलिकॉप्टर का सहारे भोजन सामग्री भेजने पर विचार किया जा रहा है। इस कार्य के लिए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर लोग जानकारी बांट रहे हैं, ताकि सरकार और जनता के संयुक्त प्रयास से मदद पहुंचाई जा सके।

 

 

आप इस पेटिशन पर साइन कर भी सपोर्ट कर सकते हैं।

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