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पोखरण-2 की सफलता के पीछे के असली हीरो, इन लोगों ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाया

11:03 am 29 May, 2018

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भारत ने पहला परमाणु परीक्षण पोखरण 1 1974 में स्वर्गाय इंदिरा गांधी के शासनकाल मे किया था, जिसका नाम था ‘स्माइलिंग बुद्धा’। परमाणु शक्ति संपन्न देश बनने कि दिशा में यह पहला प्रयास था। हालांकि, भारत को अधिक सफला मिली पोखरण-2 परीक्षण के बाद, जिसने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की सूची में ला खड़ा किया।

 

इस परीक्षण को नाम दिया गया था ‘ऑपरेशन शक्ति’।

 

भारत की यह सफलता अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए बड़ी असफला थी, क्योंकि वो इस परमाणु परीक्षण के बारे में पहले से कुछ नहीं जान पाया। पोखरण-2 के लिए ज़बर्दस्त प्लानिंग की गई थी और इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी थी, इसे टॉप सीक्रेट रखा गया था, बस कुछ लोगों की टीम ने इस महत्वपूर्ण परीक्षण को सफल कराया।

हाल ही में एक फिल्म रीलिज़ हुई है ‘परमाणु’ जो पोखरण परीक्षण पर ही आधारित है। फिल्म काल्पनिक है, लेकिन इस फिल्म को देखने से पहले जान लीजिए कि आखिर पोखरण-2 को सफल कराने वाले असली हीरो कौन थे?

 

1. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

 

पोखरण 2 परीक्षण (Pokhran II Tests )

 

इस परीक्षण के समय अब्दुल कलाम प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार होने के साथ ही डीआरडीओ के भी प्रमुख थें। परमाणु शक्ति संपन्न देश बनाने में अब्दुल कमाल की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका थी, देश को इस दिशा में आगे बढ़ाने वाले असल हीरो कलाम ही थे। उन्होंने इस दिशा में देश को मज़बूत करने के लिए अहम राजनीतिक और तकनीकी भूमिका निभाई थी।

 

2. डॉ. अनिल काकोडकर

 

पोखरण 2 परीक्षण (Pokhran II Tests )

 

प्रमुख वैज्ञानिक अनिल काकोडकर ने भी पोखरण के दोनों परीक्षणों में अहम भूमिका निभाई थी। अनिल भारी जल रिएक्टर प्रौद्योगिकी का विकास करने वाली टीम के भी प्रमुख थे।

 

3. डॉ. राजगोपाल चिदंबरम

 

पोखरण 2 परीक्षण (Pokhran II Tests )


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भारतीय भौतिक विज्ञानी राजगोपाल भी वैज्ञानिकों की उस छोटी सी टीम का हिस्सा थे जिसने भारत में परमाणु परीक्षणों में अहम भूमिका निभाई। हथियार बनाते समय वो मुख्य डिज़ाइनर थे और परीक्षण साइट पर भी उन्होंने भारतीय सेना का सहयोग किया। उन्होंने भारत में सुपरकंप्यूटर बनाने की भी परियोजना शुरू की।

 

4. डॉ. के. सनथनम

 

पोखरण 2 परीक्षण (Pokhran II Tests )

 

ऑपरेशन शक्ति के समय सनथनम ही वो शख्स थे जिन्होंने असल में दोनों वैज्ञानिक संस्थाओं डीएई और डीआरडीओ के बीच पुल का काम किया। उनके प्रयासों की बदौलत ही भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश बन पाया।

 

5. डॉ. एम. एस. रामकुमार

 

पोखरण 2 परीक्षण (Pokhran II Tests )

 

मेकैनिकल इंजीनियर रामकुमार को रोबोटिक्स में महारत हासिल है। उन्होंने भारत के परमाणु योजानाओं के लिए रोबोटिक और ऑटोमेशन तकीनीक बनाई। अपनी टीम के साथ उन्होंने पोखरण 2 योजना के लिए ऑनलाइन फ्यूलिंग और कूलेंट चैनल इंस्पेक्शन सिस्टम विकसित किया था।

 

6. अटल बिहारी वाजपेयी

 

पोखरण 2 परीक्षण (Pokhran II Tests )

 

भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासन काल में ही परमाणु परीक्षणों की श्रृंखला शुरू हुई, जिसने देश को परमाणु शक्ति संपन्न बना दिया। इस पूरी परियोजना को गुप्त रखा गया था, लेकिन जब ये सफल हो गया तो पूरी दुनिया अचंभित रह गई।

अमेरिका ने पोखरण 2 की सफलता के बाद भारत पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगाए थे, मगर भारत अपने फैसले पर अडिग रहा और आज वो मजबूत और ताकतवर देशों की सूची में शामिल है।

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