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इस पीएचडी छात्र ने 5588 करोड़ में बेची अपनी फर्म, डायबिटीज पीड़ितों के लिए है मददगार

3:54 pm 23 Aug, 2018

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अगर सही दिशा में पूरे मन से कोई काम किया जाता है तो सफलता मिलती ही है। ये पूरी तरह से प्रायोगिक बात है और इसे बार-बार लोगों ने साबित किया है। डायबिटीज का समाधान करने के अपने प्रयासों से लंदन का एक छात्र देखते ही देखते अरबपति बन गया है। उसकी इस सफलता की चर्चा आज सब कर रहे हैं। शोध करते हुए ही उसने एक ऐसा फर्म खड़ा कर डाला, जो आने वाले समय में कारगर साबित हो सकता है। पीएचडी छात्र 31 वर्षीय हैरी डेस्टेक्रो ने 5588 करोड़ में अपने फर्म को बेचकर सबको हैरान कर दिया है!

डायबिटीज का समाधान।

 

 

हैरी के बायोटेक फर्म जीइलो को डेनमार्क की हेल्थकेयर कंपनी नोवो नोरडिस्क ने खरीदा है। बड़ी रकम 623 मिलियन पाउंड (करीब 5588 करोड़ रुपए) में बिके फर्म के बारे में हर कोई जानना चाहता है। जानकारी हो कि फर्म को 2014 में हैरी, उनके प्रोफेसर एंथनी डेविस और एक बिजनेसमैन ने साथ में मिलकर खड़ा किया था। यह फर्म मधुमेह मरीजों के लिए समाधान की दिशा में काम करती है।

 

 

जीइलो के डायरेक्टर्स कहते हैंः


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“फर्म अगले दशक में डायबिटीज के इलाज को लेकर बड़े कदम उठा सकता है। अभी विश्वभर में 38 करोड़ से ज्यादा डायबिटीज के रोगी हैं। कंपनी ने रेस्पोंसिव इंसुलिन नामक एक ऐसा ग्लूकोज बनाया है, जिसके लेने से वह शरीर में जरूरत पड़ने पर ही सक्रिय होता है।”

 

 

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की मानें तो 2025 तक भारत में डायबिटीज के रोगियों की संख्या 13 करोड़ से अधिक हो जाएगी। टाइप-2 डायबिटीज में इंसुलिन का इंजेक्शन से खून में ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रहता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के मुताबिक अब फर्म के द्वारा डायबिटीज के उपचार में सहायता मिल सकेगी। जीइलो की तकनीक से अचानक शुगर स्तर को गिरने से रोका जा सकेगा।

 

 

उल्लेखनीय है कि डेनमार्क की नोवो नोरडिस्क ने ही दुनिया का पहला इंसुलिन इंजेक्शन बनाने में सफलता प्राप्त की थी। अब भविष्य में डायबिटीज के इलाज की दिशा में कंपनी की भूमिका और भी पुख्ता हुई है।

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