Advertisement

फांसी के 86 साल बाद भगत सिंह की बेगुनाही साबित करेगा एक पाकिस्तानी वकील

5:03 pm 14 Sep, 2017

Advertisement

भगत सिंह सिर्फ़ 23 साल की उम्र में देश की आज़ादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए थे। उन्हें 1931 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या के जुर्म में फांसी दे दी गई थी। भगत सिंह को फांसी दिए 86 साल हो गए हैं और अब इतने सालों बाद एक पाकिस्तानी वकील, इम्तियाज़ रशीद क़ुरेशी ने लाहौर हाईकोर्ट में उनकी बेगुनाही साबित करने का ज़िम्मा लिया है। इम्तियाज़ ने सोमवार को एक याचिका दायर की है ताकि भगत सिंह के केस की दोबारा सुनवाई जल्द से जल्द की जाए।

कौन हैं इम्तियाज़?

इम्तियाज़, लाहौर में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन चलाते हैं। पिछले साल फरवरी में पाकिस्तान के चीफ़ जस्टिस ने इम्तियाज़ क़ुरेशी की याचिका पर सुनवाई करने के लिए एक बड़ी बेंच गठित करने का आदेश दिया था, लेकिन इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अपनी याचिका में इम्तियाज़ ने कहा है कि भगत सिंह अविभाजित भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे। बहुत से पाक़िस्तानी उन्हें अपना हीरो मानते हैं।

एक समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में इम्तियाज़ ने कहाः

‘न सिर्फ़ भारतीय, बल्कि पाक़िस्तानी भी उनका सम्मान करते हैं। उनकी बेगुनाही साबित करना एक राष्ट्रीय मुद्दा है।’


Advertisement
याचिका में इम्तियाज़ ने भगत सिंह के मामले की दोबारा जांच की मांग की है और साथ ही उन्हें सम्मानित करने की गुज़ारिश की है। इसके साथ ही लाहौर के शादमान चौक पर उनकी प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव भी रखा है।

यहीं पर भगत सिंह को फांसी हुई थी।

इम्तियाज़ के अनुसार, भगत सिंह को एक झूठे केस के तहत फांसी दी गई थी। पहले उन्हें उम्रक़ैद हुई थी पर इस सज़ा को बदल दिया गया था। 2014 में कोर्ट के आदेश पर अनारकली पुलिस थाने की फ़ाइलें खंगालकर, इम्तियाज़ को सांडर्स  मर्डर केस की एफ़आईआर दी गई थी। ये 1928 का दस्तावेज़ था। ऊर्दू में लिखी इस एफ़आईआर के अनुसार, सांडर्स को दो नकाबपोश बंदूकधारियों ने 17 दिसंबर, शाम के 4:30 बजे गोली मार दी। आईपीसी के सेक्शन 302, 1201 और 109 के तहत केस दर्ज किया गया, लेकिन इस एफ़आईआर में कहीं भी भगत सिंह का ज़िक्र नहीं है। इम्तियाज़ का कहना है कि, ‘मैं भगत सिंह की बेगुनाही साबित कर के रहूंगा।’

इम्तियाज़ की इस पहल से गुजरा वक्त तो लौटकर नहीं आएगा, लेकिन आज़ादी के हीरो के प्रति उनका ये सम्मान वाकई काबिले तारीफ है। देश के बाकी लोगों को भी उनसे सबक लेना चाहिए।

Advertisement


  • Advertisement