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देश में बची है सिर्फ़ 60 पुंगनूर गाय, जानिए क्यों खास होती हैं ये

1:38 pm 21 Sep, 2017

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शेर, चीते और कुत्ते, बिल्लियों को बचाने के नाम पर आपने कई बार एनिमल लवर्स को तरह-तरह के प्रदर्शन करते देखा होगा, लेकिन क्या आपने किसी एनिमल लवर को गायों के बारे में बात करते सुना हैं। गाय तो बस राजनीति का विषय बनकर रह गई है। हालांकि, बेंगलुरू के एक व्यक्ति ने अपने ट्विटर अकाउन्ट पर पुंगनूर गाय की प्रजाति के बारे में ऐसी जानकारी साझा की है, जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

बेंगलुरू के महेश कोरिकर नामक शख्स ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पुंगनूर गायों के बारे जानकारी साझा करते हुए लिखा है कि देश में इस खूबसूरत पशु की संख्या सिर्फ 60 रह गई है।

हमारे एनिमल लवर्स कहां सो रहे हैं?

पुंगनूर गायों की एक खास प्रजाति है, जिसका दूध बहुत अच्छा माना जाता है। इस गाय के दूध में बाकी गायों की अपेक्षा फैट की मात्रा ज़्यादा होती है। इतना ही नहीं, यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। बाकी गाय के दूध में 3 से 3.5 प्रतिशत फैट होता है, जबकि पुंगनूर गाय के दूध में 8 प्रतिशत तक फैट होता है।


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कहां पाई जाती है ये गाय?

पुंगनूर गाय की उत्पत्ति आंध्र प्रदेश के चितूर जिले के पुंगनूर शहर में हुई थी, इसलिए इसका नाम पुंगनूर पड़ा। इस गाय का रंग सफेद और हल्का भूरा होता है। इसका माथा चौड़ा और सिंग छोटी होती है। इनकी लंबाई बहुत कम सिर्फ 70 से 90 सेंटीमीटर ही होती है।

तिरुपति बालाजी से है खास संबंध

तिरुपति के बालाजी मंदिर के बारे में तो आप जानते ही होंगे और वहां गए भी होंगे, लेकिन एक बात नहीं जानते होंगे। भगवान वेंकटेश को जिस लड्डू का भोग लगाया जाता है, वो पुंगनूर गाय के दूध बनता है। प्रसाद का यह लड्डू बहुत मशहूर है। इसे लिए बिना भगवान वेंकटेश का दर्शन अधूरा माना जाता है। आपको शायद ही पता होगा कि इस मंदिर में भगवान वेंकटेश का अभिषक सिर्फ पुंगनूर गाय के दूध से ही किया जाता है और इस गाय के दूध से बने घी का इस्तेमाल लड्डू बनाने में होता है।

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि ये गाय कितनी खास है, बावजूद इसके इनकी प्रजाति लुप्त होने की कगार पर है और किसी पशु प्रेमी का ध्यान इस ओर नहीं गया है।

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