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यह नर्स बनी दुनिया की सबसे ताकतवर महिला, किया अद्भुत कारनामा

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3:10 pm 9 Aug, 2018

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ऑस्ट्रेलिया की वेटलिफ्टर लेह हॉलैंड-कीन स्कॉटलैंड में 332 किलो वजनी दो पत्थरों को उठाकर दुनिया की सबसे ताकतवर महिला बन गईं  हैं। इस टूर्नामेंट को ‘द डिनी स्टोन्स-अल्टीमेट स्ट्रैंथ चैलेंज’ कहा जाता है। पेशे से नर्स 29 साल की हॉलैंड इन ‘डिनी स्टोंस’ को उठाने वाली दुनिया की दूसरी महिला बनी।

 

 

हॉलैंड-कीन से पहले इन भारी-भरकम पत्थरों को उठाने का कारनामा अमेरिका की जैन टॉड के नाम था। जैन टॉड 1979 में इन पत्थरों को लिफ्ट करने वाली पहली महिला थीं।

 

 

अब तक कई वेटलिफ्टरों ने इन पत्थरों को उठाने की कोशिश की है। हॉलैंड-कीन ने पिछले साल भी इस इन पत्थरों को उठाने का प्रयास किया था, लेकिन वो सफल नहीं हो पाई थीं।

 

इसके बाद इस टूर्नामेंट के लिए उन्होंने कड़ी ट्रेनिंग की और इस साल वो दोबारा इसमें भाग लेने पहुंची और जीत भी हासिल की। हॉलैंड-कीन बताती हैंः

 

“मैं पिछले साल यहां आई थी। लेकिन सफल नहीं हुई। फिर 6-7 महीने तक तैयारी करने के बाद मुझे सफलता मिली। इस चैलेंज के बाद मुझे महसूस हुआ कि शारीरिक ताकत के साथ-साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है।”

 

 


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जानिए क्यों इस चैलेंज का नाम ‘डिनी स्टोंस’ रखा गया

 

1860 में स्कॉटलैंड के एबरडीनशायर के पोतार्च ब्रिज के पास ग्रेनाइट के ये पत्थर पाए गए थे। उस वक्त ब्रिज के रिनोवेशन के लिए इन पत्थरों को हटाने की जरूरत पड़ी। ये पत्थर बहुत भारी थे। तब इसके लिए स्ट्रॉन्गमैन डोनाल्ड डिनी ने इन पत्थरों में एक लोहे की रिंग फंसाई और उन्होंने ही इन पत्थरों को सबसे पहले हटाया।

इसलिए इन पत्थरों का नाम उनके ही नाम पर रखा गया। इसके बाद 1953 से इन पत्थरों को उठाने के टूर्नामेंट ‘द डिनी स्टोन्स-अल्टीमेट स्ट्रैंथ चैलेंज’ की शुरुआत हुई।

 

 

बता दें कि हॉलैंड की मां सुसान हॉलैंड-कीन भी वेटलिफ्टर हैं। 2012 में तो मां और बेटी दोनों ने एक प्रतियोगिता में साथ-साथ हिस्सा भी लिया था।

 

 

यहां देखें इस टूर्नामेंट में हॉलैंड-कीन की जीत का विडियो:

 

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