Advertisement

गाजियाबाद के निकेश अरोड़ा बने सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले CEO, मिला है सैकड़ों करोड़ का पैकेज

1:59 pm 6 Jun, 2018

Advertisement

सॉफ्टबैंक के अध्यक्ष और मुख्य परिचालन अधिकारी रह चुके निकेश अरोड़ा  ने बीते मंगलवार को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित दुनिया की सबसे बड़ी साइबर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी पालो आल्टो नेटवर्क्स के सीईओ का पद संभाला। कंपनी ने सीईओ के तौर पर उन्हें सैकड़ों करोड़ रुपए का पैकेज दिया है।

जापान की जानी मानी कंपनी सॉफ्टबैंक में टॉप पोजिशन पर रह चुके निकेश अरोड़ा ने बीते साल मतभेदों के कारण जापान की इस नामी कंपनी से इस्तीफा दिया था। निकेश पिछले साल तक दुनिया के तीसरे सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले CEO में शुमार थे।

 

 

निकेश अरोड़ा को 858 करोड़ रुपए का पैकेज दिया है।

 

निकेश अरोड़ा को दिए गए 858 करोड़ रुपए के पैकेज के लिए पालो आल्टो नेटवर्क्स की ओर से एक शर्त  भी रखी गई है, जिसके पूरे होने पर ही उन्हें ये वेतन दिया जाएगा। शर्त के मुताबित निकेश को अपने कार्यकाल के दौरान कंपनी के शेयरों की कीमत चार गुना करनी होगी। करीब 19 बिलियन डॉलर की ब्रांड वैल्यू वाली  दुनिया की इस सबसे बड़ी साइबर सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर निर्माता कंपनी में करीब 50 हजार कंपनियों की हिस्सेदारी है।  कंपनी की ओर से मिलने वाले 858 करोड़  के वेतन को कुछ इस प्रकार बांटा गया है।

  • 6.7 करोड़ रुपये का सालाना वेतन।  इतना ही सालाना बोनस मिलेगा। 268 करोड़ रुपए के शेयर।
  • 07 साल तक इन शेयरों को नहीं बेच पाएंगे निकेश अरोड़ा।
  • निकेश को 6 जुलाई तक 134 करोड़ रुपए में करीब 22000 शेयर अपने पैसे से खरीदने होंगे।
  • कंपनी की शेयर वैल्यू 150 फीसदी बढ़ने पर उन्हें 443 करोड़ रुपए का स्टॉक विकल्प मिलेगा।
  • 04 गुना तक कंपनी की कीमत बढ़ी, तो ये 443 करोड़ रुपए का पूरा स्टॉक हो जाएगा उनका।
  • इस तरह निकेश का पूरा सालाना पैकेज 858 करोड़ रुपए का हो जाएगा।

 

अगर निकेश अरोड़ा ये शर्तें पूरी करतें हैं, तो वो दुनिया के सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले सीईओ बन जाएंगे।


Advertisement
 

 

गाजियाबाद के हैं 50 वर्षीय निकेश अरोड़ा।

 

गाजियाबाद के रहने वाले निकेश अरोड़ा सन 1989 में IIT- BHU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग  में बीटेक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए। कहा जाता है कि निकेश जब MBA की पढ़ाई करने अमेरिका पहुंचे तो उनकी जेब में महज 200 डॉलर ही थे। इस दौरान पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें बर्गर तक बेचने पड़े। बोस्टन यूनिवर्सिटी से MBA करने के बाद कुछ साल तक उन्होंने बतौर चार्टर्ड फाइनेंस एनालिस्ट  काम किया और साल 2004 में गूगल से जुड़ गए, जहां उन्हें यूरोपियन ऑपरेशंस की अगुवाई करने का मौका मिला। बाद में कंपनी ने उन्हें चीफ बिजनेस ऑफिसर बना दिया।

 

 

अक्टूबर 2014 में निकेश अरोड़ा ने गूगल के वाइस चेयरमैन का पद छोड़कर सॉफ्टग्रुप को ज्वाइन किया। सॉफ्टबैंक में अपने कार्यकाल के दौरान निकेश अरोड़ा ने कंपनी की ग्लोबल इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी तैयार की। 2014 में उनकी अगुवाई में सॉफ्टबैंक ने स्नैपडील  और ओला जैसे कई  स्टार्टअप्स में निवेश किया। जापान की इस नामी कंपने के साथ जुड़ना निकेश अरोड़ा का एक बड़ा कदम था, यहां उनका ओहदा सॉफ्टबैंक के संस्थापक मसायोसी सन के बाद दूसरे नंबर पर था। सॉफ्टबैंक ने अरोड़ा को दो साल में करीब 1946 करोड़ा का वेतन दिया, जिसके चलते बीते साल तक वो दुनिया के तीसरे सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले सीईओ बने रखे। हालांकि, कुछ मतभेदों के चलते सॉफ्टबैंक से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बावजूद एक साल तक वह सॉफ्टबैंक के सलाहकार के रूप में काम करते रहे थे।

 

Advertisement


  • Advertisement