Advertisement

अगर नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री तो कुछ ऐसी होती देश की तस्वीर!

1:17 pm 17 Aug, 2018

Advertisement

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू को लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का मानना है कि आज़ादी के बाद देश की प्रगति में नेहरू का बहुत योगदान रहा है, क्योंकि उन्होंने देश को शून्य से आगे बढ़ाया। वहीं, कुछ लोगों का तर्क है कि नेहरू ने देश का विकास करने की बजाय, उसे और पीछे धकेल दिया है। नेहरू की बजाय यदि मोहम्मद अली जिन्ना या सरदार वल्लभभाई पटेल, पहले प्रधानमंत्री बनते तो आज देश के विकास की तस्वीर कुछ और होती। अब इतिहास को तो बदला नहीं जा सकता, लेकिन चलिए हम आपको कुछ संभावनाएं बताते हैं कि पटेल या जिन्ना के पीएम बनने पर क्या अलग होता।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या सरदार वल्लभभाई पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री!

 

मोहम्मद अली जिन्ना

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

भारत और पाकिस्तान के बंटवारे में यदि किसी शख्स की भूमिका सबसे अहम थी तो वो थे मोहम्मद अली जिन्ना। हाल ही में दलाई लामा ने भी एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि गांधी जी जिन्ना को प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे, मगर नेहरू नहीं माने। चलिए आपको बताते हैं कि यदि जिन्ना प्रधानमंत्री बनते तो देश के हालात कैसे होते।

 

1. भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र नहीं रहता, जैसा कि आज है

 

नेहरू की कुछ लोग भले ही आलोचना करें, मगर ये सच है कि नेहरू की वजह से ही आज भारत धर्मनिरपेक्ष देश बना हुआ है, जहां सभी धर्म के लोग आज़ादी से रहते हैं। उन्होंने सभी धर्म और समुदाय के लोगों को एकजुट रखा। नेहरू की बजाय यदि जिन्ना प्रधानमंत्री बने होते को भारत की धर्मनिरपेक्ष वाली छवि बिल्कुल नहीं बनती, क्योंकि जिन्ना ने तो धर्म के आधार पर ही देश का बंटवारा करवाया। ये बात सच है कि शुरुआत में जिन्ना भी धर्मनिरपेक्ष थे, लेकिन ब्रिटिशों के भारत छोड़ने से कुछ समय पहले से ही उनका रवैया विभाजनकारी हो गया और वो मुसलमानों के पैरोकार बन बैठे।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

2. भारत का बंटवारा कभी नहीं होता

 

एक सच यह भी है कि जिन्ना यदि प्रधानमंत्री बनते तो भारत का बंटवारा नहीं होता। हालांकि, ये नहीं कहा जा सकता कि हिंदू-मुस्लिम दंगे नहीं होते, लेकिन हां वो सब छोटे पैमाने पर होता। जिन्ना के प्रधानमंत्री बनने पर वर्तमान की कश्मीर समस्या पनपती ही नहीं, क्योंकि जब अलग देश ही नहीं बनता तो कश्मीर की मांग फिर कौन करता?

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

3. जवारलाल नेहरू बेहतरीन विदेश मंत्री बन सकते थे

 

नेहरु बहुद बुद्धिमान थे इस बात में कोई शक नहीं है औऱ भारत की विदेश नीति को भी उन्होंने बहुत प्रभावित किया। जिन्ना के प्रधानमंत्री बनने पर यदि नेहरू को विदेश मंत्री बनाया जाता तो वैश्विक स्तर पर बहुत जल्दी भारत की छवि एक मज़बूत राष्ट्र के रूप में ऊभरती। नेहरू सफल विदेश मंत्री साबित हो सकते थे।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

4. भारत की राष्ट्रीय नीति धर्म से ज़्यादा प्रभावित होती

 

यदि जिन्ना देश के प्रधानमंत्री बनते तो भारत सबसे ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश बन जाता है और देश की अधिकांश ऊर्जा हिंदू-मुस्लिमों को एक-साथ लाने में बर्बाद होती। हालांकि, अब भी ऐसा होता है, लेकिन भारत का विभाजन यदि नहीं होता तो सरकार की सारी नीतियां भी धर्म आधारित ही होती और बाकी मुद्दे कहीं पीछे छूट जाते । किसी साधारण से मसले पर भी एक राय बनाना बहुत मुश्किल काम होता और विकास की दौर में भारत और पीछे रह जाता।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

5. भारत सबसे ज़्यादा आबादी वाला और सबसे गरीब देश होता

 

जिन्ना यदि भारत के प्रधानमंत्री बनते तो अरब देशों से हमारे रिश्ते अच्छे होते और इरान से डायरेक्टर पाइलाइन आ सकती थी जिससे गैस आधारित वाहनों की संख्या बढ़ती। साथ ही कराची और चिटगांव चूंकि भारत का हिस्सा होते ऐसे में पानी के रास्ते व्यापार भी आसान होता, लेकिन इसके साथ ही भारत सबसे ज़्यादा आबादी वाला और सबसे गरीब देश होता।

 


Advertisement
नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

सरदार वल्लभभाई पटेल

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

ये बात सभी जानते हैं कि आज़ादी के समय सरादर पटेल प्रधानमंत्री पद के लिए बहुत से लोगों की पहली पसंद थे, मगर उनकी बजाय नेहरू को वो पद मिल गया और पटेल गृह मंत्री बने। पटेल ने आज़ादी के बाद देश को एकता के सूत्र में बांधे रखने में अहम भूमिका निभाई। यदि वो आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनते तो आज भारत की तस्वीर शायद कुछ और होती।

 

1. कश्मीर को लेकर भारत इतना अक्रामक नहीं रहता

 

सरदार पटेल चाहते थे कि कश्मीर भारत का हिस्सा बना रहे, मगर वो कश्मीर की मांग को लेकर बहुत अक्रामक नहीं थे जैसे की नेहरू। वो चीज़ों का घालमेल नहीं करना चाहते थे। मुस्लिम बहुलता वाले कश्मीर में पटेल सैन्य कार्रवाई के हक में थे। कश्मीर यदि आज भारत का हिस्सा है तो उसका क्रेडिट नेहरू को जाता है, क्योंकि यदि उस वक्त फैसला पटेल को लेना होता तो शायद आज हालात कुछ और होते।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

2. पूरा जम्मू कश्मीर भारत का होता

 

यदि पटेल प्रधानमंत्री बनते तो शायद कश्मीर मसला इतना पेचीदा न बनता जितना की आज है। वो कश्मीर में सैन्य कार्रवाई के पक्ष मे थे। जब पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला किया तो इस मसले को नेहरू युनाइटेड नेशन में ले गए, लेकिन पटेल ऐसा नहीं करतें, इसकी बजाय वो पूरी तरह से युद्ध करते और हो सकता है कि पूरा कश्मीर भारत के कब्जे मे होता। युनाइटेड नेशन के आने से मामला उलझ गया और आज तक अनसुलझा ही है।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

3. भारतीय राजनीति पर किसी एक ही परिवार का कब्ज़ा नहीं होता

 

जवाहर लाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनका पूरा खानदान राजनीति में आ गया और कांग्रेस पार्टी तो जैसे उनकी जागीर हो गई थी। यदि पटेल प्रधानमंत्री बनते तो शायद राजनीति में परिवारवाद को इतना बढ़ावा नहीं मिलता और कांग्रेस पार्टी की हालत भी इतनी बदतर नहीं होती, जितनी की आज है। दरअसल, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अधिकांश सदस्य पटेल को ही प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन गांधी जी की वजह से ऐसा न हो सका।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

4. भारतीय अर्थव्यवस्था शायद शुरू से ही पूंजीवादी रहती

 

भारत के व्यापारी शुरू से ही पटेल को प्रधानमंत्री बनाए जाने के पक्ष में थे, क्योंकि वो नेहरू की बजाय पूंजीवाद के ज़्यादा समर्थक थे। पटेल यदि पीएम बनते तो शायद वो उद्योग के लिहाज से ज़्यादा बेहतर फैसले ले पाते और शुरू से ही देश पूंजीवाद के रास्ते पर चलता।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

 

5. भारत कॉमनवेल्थ की सदस्यता खो सकता था

 

यदि पटेल आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनते तो भारत लॉर्ड माउंटबेटेन की सलाह मानकर कश्मीर मसले को युनाइटेड नेशन के पास नहीं ले जाता, क्योंकि कश्मीर के मुद्दे पर पटेल हमेशा सैन्य कार्रवाई के पक्ष में थे। मगर उस वक्त ये भारत के लिए अच्छा नहीं होता, क्योंकि ज्यादातर पश्चिमी देश पाकिस्तान के समर्थन में खड़े थे और भारत के लिए कई मोर्चों पर मुश्किलें थी। पाकिस्तान के साथ ही वो चीन से भी लड़ रहा था, ऐसे में उसकी कॉमनवेल्थ की सदस्यता खतरे में पड़ जाती।

 

नेहरू की बजाय जिन्ना या पटेल बनते पहले प्रधानमंत्री  (if jinnah or patel had Become First PM)

Advertisement


  • Advertisement