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आगरा के मंदिर में चलता है स्कूल, 70 फीसदी से अधिक छात्र हैं मुस्लिम

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12:38 am 19 Mar, 2016

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आपसी भाईचारे की कभी-कभी ऐसी मिसाले देखने को मिलती हैं, जो वाकई अद्भुत भारत की सच्ची तस्वीर पेश करती हैं। मिसालें भी ऐसी, जो सांप्रदायिक और जातिगत मसलों से ऊपर उठकर मानवता और इंसानियत का पाक चेहरा दिखाती हैं।

आगरा में ऐसी ही एक मानवता और भाईचारे की तस्वीर देखने को मिली। शहर के पथवारी मां मंदिर में एक ऐसा स्कूल चलता है जहां पढ़ने वाले बच्चे गरीब तबके के हैं। और तो और यहां पढ़ रहे बच्चों में करीब 70 फीसदी छात्र मुस्लिम समुदाय से हैं।

‘कोशिश- एक आशा, मेरी पाठशाला’ की शुरुआत 2015 के अगस्त महीने में पथवारी मंदिर में हुई थी। दो छात्रों से शुरु हुए इस स्कूल में फिलहाल 47 बच्चे पढ़ रहे हैं, जिनमें 33 बच्चे मुस्लिम समुदाय से हैं। इस स्कूल को शुरु करने का मकसद उन गरीब बच्चों को शिक्षा मुहैया कराना था, जिनका परिवार गरीबी के कारण अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ है।

इस स्कूल के संस्थापक पिंटू प्रतीक करदम कहते हैंः


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“मैं रोज़ इस इलाक़े के इन बच्चों को देखा करता था। ये स्कूल नहीं जाते थे और हरदम इन गलियों में बेमतलब अपना समय बर्बाद करते थे। मुझे लगा कि इन्हें शिक्षित करना मेरा कर्तव्य है। हम उन्हें इतना तो सीखा देना चाहते थे कि वे सही और ग़लत का फ़र्क समझना सीख जाएं। मैने अपने इस योजना के बारे में अपने कुछ दोस्तों से बात की।”

पिंटू प्रतीक करदम के अलावा अब इस स्कूल की देखरेख उनके 4 दोस्त करते हैं। कपिल चौधरी और जितेंद्र सिंह पेशे से एक निजी कंपनी में काम करते हैं। नीतेश अग्रवाल पेशे से दवा के थोक व्यापारी हैं। वही नेहा गृहणी हैं। पिंटू खुद नौकरीपेशा हैं। वह कहते हैं:

“जब हमने इस स्कूल की शुरुआत की थी, तो हमे विश्वास नहीं था कि इस मंदिर में बने स्कूल में मुस्लिम समुदाय के बच्चे भी पढ़ने आएंगे। अब हमारे पास पढ़ने वाले बच्चों में 33 मुस्लिम हैं। उनके अभिभावक उन्हें खुद यहां छोड़ कर जाते हैं और उन्हें यहां मंदिर में स्कूल चलाए जाने से भी एतराज़ नहीं है।”

यह स्कूल रोजाना सुबह 9 बजे खुल जाता है और 12 बजे तक इसमें पढ़ाई होती है। इस दौरान यहांं बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जाती है। बच्चों को उच्चस्तरीय शिक्षा के लिए तैयार किया जाता है।

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