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बड़े साइज के कपड़े लेना हो या दबाकर टूथपेस्ट का इस्तेमाल, मीडिल क्लास फैमिली की ये 9 बातें खास हैं

11:30 am 26 Jul, 2018

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आजकल के बच्चों के पास हर तरह की सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं। उनके मुंह खुलने से पहले ही मां-बाप उन्हें हर चीज़ लाकर दे देते हैं, लेकिन आपके और हमारे ज़माने में मीडिल क्लास फैमिली के साथ ऐसा नहीं होता था। 6-7 लोगों के परिवार में बहुत किफायत से और सोच-समझकर घर चलाना पड़ता था, उस ज़माने में छोटी-छोटी बचत भी बहुत मायने रखती थी, जिसे सोचकर शायद आज आपको हंसी आ जाए, मगर रियूज़ और मैनेजमेंट का असली मतलब वही लोग समझते थे। यहां हम आपको 90 के दशक की कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं जिसे देखकर शायद आपको भी बचपन की याद आ जाए।

 

1. किसी चीज को बर्बाद नहीं करते थे। साबुन घिसकर जब छोटा हो जाता था, तब हम उसे नए साबुन में चिपका देते थे, ताकि तिनका भर साबुन भी बर्बाद न हो।

 

 

2. जिनके दो-तीन बच्चे होते थे, तो वो जिस बच्चे का कपड़ा लेने जाते उसके माप का नहीं, बल्कि उसके बड़े भाई के माप का ले आते थे, ताकि एक ही शर्ट में दोनों का काम चल जाए। थे न बुद्धिमान!

 

 

3. टीवी का रिमोट गंदा न हो जाए, इसलिए शायद उस ज़माने में आप भी अपने रिमोट को प्लासिटक की थैली में कवर करके रखते होंगे। बैटरी बदलने की ज़रूरत पड़ी तो बदलकर फिर से रिमोट प्लास्टिक में पैक हो जाता था।

 

 

4. घर में नई क्रॉकरी है तो सही, मगर ये निकलती तभी है जब घर पर मेहमान आते हैं। बाकी दिन तो आपको पुराने बर्तन में ही खाना परोसा जाता है।

 


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5. कोई रिश्तेदार जाते समय बच्चों को 100-50 रुपए थमा तो देते थे, मगर उन पैसों पर बच्चों का हक कहां होता था। रिश्तेदार के जाते ही पैसे मम्मी के हवाले करने होते थे।

 

 

6. शैंपू खत्म हो जाए तो उसकी बोतल में पानी भरकर तब तक इस्तेमाल करते थे जब तक झाग आना बंद न हो जाए, इतना किफायती इस्तेमाल कोई और कर सकता है भला!

 

 

7. कोल्डड्रिंक की बोतल खत्म होने पर फेंकी नहीं जाती थी, क्योंकि तब हम रीयूज़ पर विश्वास जो करते थे, इसलिए उसमें पानी भरकर रखते थे।

 

 

8. टूथपेस्ट की ट्यूब को तब तक दबाते रहते थे जब तक उसमें से एक टूथपेस्ट पूरा तरह से न निकल जाएं और जब दबाने पर टूथपेस्ट न निकले तो कैंची से उसे काटकर टूथपेस्ट का आखिरी कतरा तक इस्तेमाल करते थे।

 

 

9. घर में अगर कहीं से गिफ्ट आ जाए तो उसे खोलने की बजाय एक कोने में रख दिया जाता था, ये कहकर कि किसी को देने के काम आएगा।

 

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