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महाभारत के मामा शकुनी के बारे में यकीनन आप नहीं जानते होंगे ये 8 बातें

11:15 am 2 Jun, 2018

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महाभारत में यदि किसी किरदार से लोग तहे दिल से नफरत करते हैं तो वो हैं मामा शकुनी। गंधार के राजकुमार और गांधारी के भाई शकुनी जिनकी वजह से महाभारत का युद्ध हुआ। दुर्योधन की गलत बातों को हमेशा सहयोग करने वाले मामा शकुनी की छवि इतनी खराब है कि आज भी यदि किसी इंसान की बुरे व्यक्ति से तुलना करनी हो तो कहते हैं ‘वो तो मामा शकुनी है’। यानी मामा शकुनी बुराई का प्रतीक बन चुके थे।

शकुनी से भले ही लोग कितनी भी नफरत कर लें, मगर उन्हें आप खारिज नहीं कर सकते। मामा शकुनी के बारे में बहुत सी ऐसी बातें जो लोग नहीं जानतें। चलिए आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें, जो शायद ही किसी को पता हो।

 

1. मामा शकुनी के दो बेटे थे

 

उलुका और व्रिकासुर शकुनी के दो बेटे थे। ऐसा कहा जाता है कि बेटे उलुका के कहने पर भी शकुनी गंधार जाने के लिए तैयार नहीं हुए, क्योंकि वो भीष्म पितामह और कुरू वंश को नाश करने की  अपनी प्रतिज्ञा पूरी करना चाहते थे।

 

 

2. मामा शकुनी के 100 भाई भी थे

 

शकुनी राजा सुबाला के 100वें पुत्र थे, इसलिए उन्हें सौबाला भी कहा जाता था। शकुनी के 99 भाई और एक बहन थी। वो अपने भाई-बहनों मे सबसे छोटे और सबसे बुद्धिमान थे।

 

 

3. पांडवों से नफरत नहीं करते थे

 

आपको ये सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन ये सच है कि पांडवों के लिए मामा शकुनी के मन में कोई बुरी भावना नहीं थी। वो भीष्म पितामह से नफरत करते थे, क्योंकि उनकी वजह से गांधारी को एक अंधे व्यक्ति से शादी करनी पड़ी थी।

 

 

4. शकुनी बाजीगर थे

 

महाभारत में पासे के खेल का बहुत महत्व था और मामा शकुनी इस खेल के बाजीगर थे। अपनी बाजीगरी से शकुनी इस खेल में युद्धिष्ठिर को हराकर उनका राजपाट छीन लेते हैं।


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5. शकुनी के पासे हाथी दांत से बने होते थे

 

ऐसा माना जाता था कि शकुनी के पासे उनके पिता की जांघ हड्डियों से बने थे, मगर असल में ये हाथी दांत से बने थे। अपने इसी खास पासे की वजह से वो चौपड़ के खेल के बादशाह बन गए थे।

 

 

6. शकुनी को सहदेव ने मारा था

 

मामा शकुनी को कुंती के छोटे बेटे सहदेव ने मारा था। भरी सभा में द्रौपदी के चीरहरण के समय ही सहदेव ने मामा शकुनी को मारने का प्रण लिया था।

 

 

7. केरल में शकुनी का एक मंदिर भी है

 

आपको शायद जानकर हैरानी हो मगर रावण की तरह ही मामा शकुनी का भी एक मंदिर है। यह मंदिर केरल के कोलम जिले में है, यहां उनके अच्छे गुणों के बारे में बताया गया है और इस मंदिर का नाम है पवित्रेस्वरम।

 

 

8. शकुनी को द्वापर युग का ध्वजवाहक माना जाता है

 

द्वापर युग को ऐसे युग के रूप में याद किया जाता है, जब लोगों का रिश्तों पर से विश्वास उठ गया, भाई-भाई से युद्ध करने लगा। कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों और पांडवों के बीच जो युद्ध हुआ उसकी वजह मामा शकुनी ही थे, उन्होंने ही भाईयों को युद्ध के मैदान में आमने सामने ला खड़ा किया था।

 

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