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कुतुब मीनार से बस 8 मीटर छोटा है दिल्ली का नया एतिहासिक लैंडमार्क, सच्चाई जानकर हिल जाएंगे

4:55 pm 3 Sep, 2018

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आप सोच रहे होंगे कि शायद दिल्ली में कोई नई इमारत बन रही है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। हम जिस लैंडमार्क की बात कर रहे हैं उसकी सच्चाई जानकर आपको विश्वास नहीं होगा और आप ये भी नहीं समझ पाएंगे कि इस उपलब्धि पर गर्व करना चाहिए या फिक्र। बहरहाल, यह ऐतिहासिक लैंडमार्क कुतुब मीनार नहीं है।

डंपिंग ग्राउंड (largest duming ground)

 

आप अपने दिमाग पर ज़्यादा ज़ोर दें इससे पहले ही हम आपको बता देते हैं कि दिल्ली का ये नया लैंडमार्क है गाज़ीपुर लैंडफिल यानी डंपिंग ग्राउंड। जी हां, यहां कचरे का अंबार इतना ज़्यादा लग चुका है कि उसने एक छोटी पहाड़ी का रूप ले लिया है और हैरानी की बात तो ये है कि इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार से महज़ 8 मीटर ही कम हैं। इस कचरे के ढेर की ऊंची 65 मीटर है, जबकि कुतुब मीनार 73 मीटर ऊंचा है। इंसानों का लगाया कचरे का ये अंबार देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

कुतुब मीनार से ऊंचा डंपिंग ग्राउंड

 

डंपिंग ग्राउंड (largest duming ground)

 

दरअसल, इस डंपिंग ग्राउंड में क्षमता से अधिक कचरा रोजाना यहां फेंका जाता है जिसकी वजह से कचरे का पहाड़ बन चुका हैं। इसे 15 साल पहले ही बंद हो जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासन की लापरवाही की बदौलत ये आजतक खुला हुआ है। वैसे गाजीपुर इकलौता ऐसा डपिंग ग्राउंड नहीं है, जहां कचरे का अंबार लगा है। हमारे देश में ऐसे कई और डंपिंग ग्राउंड हैं।

 

धापा, कोलकाता

डंपिंग ग्राउंड (largest duming ground)

 

कोलकाता के इस डपिंग ग्राउंड में रोज़ाना करीब 2500 टन कचरा डाला जाता है और यह 1980 में शुरू हुआ था। जाहिर है इस एरिया के आसपास रहने वाले लोगों को वायु और ध्वनि प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि लोकल माफिया इस जगह का इस्तेमाल पैसे कमाने के लिए करते हैं। दरअसल, कोलकाता की 40 प्रतिशत हरी सब्ज़ियां यहीं डंपिंग ग्राउंड में उगाई जाती हैं।

 

देवनार, मुंबई

डंपिंग ग्राउंड (largest duming ground)


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मुंबई का ये डपिंग ग्राउंड 132 हेक्टेयर में फैला हुआ है और यहां रोज़ाना 5,500 मेट्रिक टन कचरा फेंका जाता है। इस जगह के आसपास रहने वालों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। 2016 में इस जगह पर दो बार भयंकर आग भी लग चुकी है, जिससे जहरीली गैस निकली थी। यहां आसपास रहने वालों में बच्चों की मृत्यु दर भी ज्यादा है।

 

पेरुंगुडी और कोडुंगयूर, चेन्नई

डंपिंग ग्राउंड (largest duming ground)

 

दो मंजिल बिल्डिंग जितने ऊंचे ये डंपिंग ग्राउंड चेन्नई शहर के पूरे कचरे का भार सहता है। 1988 में शुरू हुआ ये डंपिंग ग्राउंड अपनी क्षमता से अधिक कचरे की वजह से खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है।

 

जवाहरनगर, हैदराबाद

डंपिंग ग्राउंड (largest duming ground)

 

100 एकड़ के इस डंपिंग ग्राउंड मे हर दिन 5000 टन कचरा फेंका जाता है। इस जगह के आसपास काला तैलीय पानी है। इसकी वजह से आसपास का पूरा माहौल प्रदूषित हो चुका है। स्थानीय लोग झील के पानी के भी काला होने की शिकायत दर्ज करा चुके हैं।

 

मवल्लीपुरा, बैंग्लोर

डंपिंग ग्राउंड (largest duming ground)

 

100 एकड़ में फैले इस डंपिंग ग्राउंड में भी लाखों टन कचरा फेंका जाता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। इस आईटी सिटी में भी इस गंभीर समस्या का समाधान ढूंढ़ने की कोई कोशिश नहीं की जा रही। वेस्ट मैनजमेंट ठीक तरह से नहीं होने के कारण आसपास के गावों को इससे गंभीर खतरा हो सकता है।

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