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संकटग्रस्त रोहिंग्या मुसलमानों के लिए सिखों ने शुरू किया ‘लंगर’

6:30 pm 15 Sep, 2017

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रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार की खबरें लगातार मीडिया में आ रही हैं। म्यांमार से निकाले जाने के बाद बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों के पास न जमीन बचा और न छत। ऐसे में एक स्वयंसेवी संस्था म्यांमार-बांग्लादेश सीमा पर उनके लिए ‘लंगर’ का आयोजन कर रही है।

जाति और धर्म से परे जाकर सिख स्वयंसेवकों का यह समूह मानव-धर्म निभा रहा है। सीमा पर देश निकाला झेल रहे रोहिंग्या मुसलमानों के लिए डूबते को तिनके का सहारा बनकर आया है ‘द खालसा एड’। इनके द्वारा आयोजित लंगर में रोज लगभग 35 हजार रोहिंग्या मुसलमानों को भोजन कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है।


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यह लंगर पिछले चार दिनों से चल रहा है। बांग्लादेश के तेकनाफ में बना गए शरणार्थी शिविर में खालसा एड के स्वयंसेवक भोजन-पानी शरणार्थियों तक पहुंचा रहे हैं। इसे ‘गुरु का लंगर’ भी कहा जा रहा है। लंगर परोसने से पहले यहां गुरु की अरदास की जाती है, फिर शरणार्थियों की सेवा में लगे हुए कार्यकर्ता लोगों में भोजन बांटते हैं। वे इस प्रयास में रहते हैं कि कैम्प में कोई भी भूखा न सोये।

ये लोग सही में मानवता की मिशाल पेश कर रहे हैं। एक तरफ खुद के देश से निकाले जाने के बाद उन्हें कोई भी देश शरण देने को राजी नहीं है, वहीं ‘खालसा एड’ का यह कदम काबिल-ए-तारीफ़ है।

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