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इन 10 देसी धनकुबेरों ने शुरु की थी मामूली जिन्दगी, मेहनत से बदल ली अपनी किस्मत

12:40 pm 6 Mar, 2016

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जिन्दगी कब जो यू-टर्न मार ले, कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ ऐसा ही इन सामान्य लोगों की जिन्दगी में भी हुआ, जो बाद में किम्वदन्ती बन गए। जी हां, हम आपको बताने जा रहे हैं अपने देश के उन 10 धनकुबेरों के बारे में जिन्होंने अपनी जिन्दगी बेहद मामूली रूप में शुरु की थी, लेकिन अपनी मेहनत के बदौलत तकदीर को बदलने में कामयाब रहे।

1. धीरूभाई अम्बानी, रिलायन्स समूह के संस्थापक

धीरूभाई ने अपने करियर की शुरुआत एक भजिया बेचने वाले के रूप में की थी। बाद में वह एक पेट्रोल पम्प पर अटेन्डेन्ट का काम करने लगे। धीरूभाई ने रिलायन्स समूह की स्थापना की। आज यह कम्पनी इस देश की बड़ी कंपनियों में से एक है।

2. लक्ष्मण दास मित्तल, सोनालिका के समूह के संस्थापक

जेब में पांच हजार रुपए और कई छोटे-मोटे कर्ज। लक्ष्मण दास मित्तल की बस यही पूंजी थी। जिन्दगी अस्त-व्यस्त थी और उनका परिवार दिवालिया हो गया था।

साहसी मित्तल ने अपने दम पर एक बड़ा कारोबार खड़ा कर लिया। आज उनका कारोबार 70 देशों में फैला है और वह दुनिया के 73वें सबसे बड़े रईस कहे जाते हैं।

3. गौतम अडाणी, अडाणी समूह के संस्थापक

18 साल की उम्र के अडाणी अपनी जेब में कुछ ही रुपए लेकर मुम्बई पहुंचे थे। आज उनकी कम्पनी में 60 हजार से अधिक लोग काम करते हैं।

4. इन्दिरा नूयी, पेप्सीको की मुख्य कार्यकारी अधिकारी

कॉलेज के दिनों में नूयी एक पार्ट टाइम रिसेप्सनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। अपने मेहनत के दम पर इन्दिरा ने खुद के लिए मुकाम बनाया और पेप्सीको की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बन गईं। उनकी सालाना सैलरी है 18 मीलियन डॉलर।

5. करसनभाई पटेल, निरमा समूह के संस्थापक


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एक किसान परिवार में जन्में करसनभाई साइकिल पर खुद निरमा बेचने निकलते थे। निरमा ने अपार सफलता हासिल की। उनकी कंपनी में करीब 18 हजार से अधिक लोग काम करते हैं।

6. धर्मपाल गुलाटी, एमडीएच मसाले के संस्थापक

धर्मपाल गुलाटी दिल्ली में तांगा चलाते थे। उन्होंने पहली बार 140 फुट का दुकान खोला और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज उन्हें मसाला किंग कहा जाता है और उनके उत्पाद अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड सहित यूरोप के कई देशों में मिलते हैं।

7. दिलिप संघवी, सन फर्मा के संस्थापक

दिलिप संघवी का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। अपनी कम्पनी शुरु करने से पहले संघवी दवाइयों के ड्रिस्ट्रीव्यूटर के तौर पर काम करते थे। उन्होंने सिर्फ 10 हजार रुपए की पूंजी लगाई थी। आज उनकी कम्पनी में 30 हजार से अधिक लोग काम करते हैं।

8. अनिल अग्रवाल, वेदान्ता समूह के संस्थापक

19 वर्ष की छोटी अवस्था में पटना छोड़ने के बाद अनिल अग्रवाल मुम्बई में एक स्क्रैप डीलर के तौर पर काम करने लगे। आज वेदान्ता समूह का नेटवर्थ 3 बिलियन डॉलर का है।

9. कैप्टन गोपीनाथ, एयर डेक्कन के संस्थापक

एक साधारण से परिवार में जन्में कैप्टन गोपीनाथ ने भारतीय विमानन उद्योग का चेहरा बदल दिया। उन्होंने एक ऐसी एयरलाइन लॉन्च की जिसमें बैठकर गरीब व्यक्ति भी सफर कर सकता था।

10. एन आर नारायणमूर्ति, इन्फोसिस के संस्थापक

नारायणमूर्ति ने पाटनी कम्प्युटर सिस्टम के साथ मिलकर अपने करियर की शुरुआत की थी। इन्फोसिस की शुरुआत सिर्फ 10 हजार रुपए की बचत से शुरू की गई थी। इस कम्पनी ने भारतीय आईटी इन्डस्ट्री का चेहरा बदल दिया।

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