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चीन में सुपरहिट हुई इस फिल्म का भारतीय कनेक्शन जान हैरान रह जाएंगे आप

11:00 am 18 Jul, 2018

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आमिर खान की फिल्म दंगल ने चीन में काफी अच्छा बिज़नेस किया था, मगर आज हम जिस सुपरहिट फिल्म की बात करने जा रहे हैं वो कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है, बल्कि चीन की फिल्म है। हालांकि, इसका भारत से बहुत गहरा कनेक्शन है और इस फिल्म की सफलता ने सबको हैरान कर दिया है।

आखिर क्या है भारतीय कनेक्शन

चीन में बनी फिल्म ‘डाइंग टू सर्ववाइव’ कैंसर की दवाइयां, भारत और चीन के आसपास घूमती है। दरअसल, इस फिल्म में कैंसर की महंगी दवाओं के कारण चीनी लोगों को होने वाली दिक्कतों को दिखाया गया है। भारत के मुकाबले चीन में कैंसर रोधी दवाएं महंगी हैं। इस वजह से चीन के आम लोग दवाओं के लिए बहुत हद तक भारत पर निर्भर हैं। यह फिल्म अमेरिकी फिल्म ‘डलास बायर्स क्लब’ की रीमेक है।

 

 

कैंसर रोधी दवाइयां

फिल्म में भी इसी समस्या को दिखाया गया है। फिल्म में एक कैंसर रोगी लू योंग सस्ती दवाओं के लिए अपनी गिरफ्तारी की परवाह किए बिना भारत आता है। लू को क्रॉनिक मेलॉइड ल्यूकेमिया (कैंसर का एक प्रकार) है। यह दरअसल एक सच्ची घटना पर आधारित है। लू को चीन में कैंसर के मरीजों को भारत से नकली दवाइयां बेचने के आरोप में 2013 में गिरफ़्तार किया गया था। दो साल बाद उन्हें साल 2015 में रिहा कर दिया गया था। लू ने भारत की जेनरिक दवाई से सैकड़ों मरीजों की मदद की थी।

 


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चीन में महंगी कैंसर की दवाइयां मरीज़ों के लिए बहुत बड़ी समस्या है इससे राहत के लिए चीन की सरकार ने कई कदम भी उठाए हैं। इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद चीन ने कहा था कि उसका भारत के साथ दवाइयों और ख़ासकर कैंसर रोधी दवाइयों के आयात को लेकर समझौता हुआ है। इससे पहले चीन ने कुछ कैंसर रोधी दवाइयों के आयात से टैरिफ भी हटाया था।

कैंसर रोधी दवाइयां मिलना चीन में मुश्किल है।

 

 

इतना ही नहीं, खबर तो यह भी है कि चीन कुछ विदेशी फार्मा कंपनियों के साथ भी दवाइयों की कीमत कम करने को लेकर बातचीत करने वाला है। वहीं, चीन के एक सरकारी अखबार का कहना है कि चीन में मिलने वाली भारतीय दवाओं में ज़्यादातर कैंसर रोधी दवाइयां हैं और इन दवाइयों के ज़्यादा असरदार होने के कारण चीन में बनी दवाइयों से ज्यादा भरोसा लोग इन पर करते हैं।

देश की सीमाओं को लेकर चीन हमेशा दादागिरी दिखाता आया है और इस बात में कोई दो राय नहीं है कि वो भारत से ज़्यादा ताकतवर है, लेकिन जब बात इंसानी जान की आती है तो इस मामले में बाज़ी भारत के हाथ में है।

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