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पश्चिम बंगाल में सरकार को ट्रैक पर लाने के लिए बार-बार हाईकोर्ट को सामने आना पड़ रहा है!

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1:43 pm 16 Sep, 2017

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पश्चिम बंगाल में विजयादशमी के दिन विसर्जन को लेकर चल रहा विवाद जारी है। यह मामला हाईकोर्ट में है और अब राज्य सरकार ने झुकते हुए विसर्जन का समय रात 10 बजे तक करने का फैसला किया है।

इससे पहले राज्य की तृणमूल सरकार ने विजयादशमी के दिन 6 बजे तक दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन किए जाने का निर्देश दिया था। सरकार का तर्क है कि दशमी के अगले दिन यानि एकादशी को मोहर्रम है, लिहाजा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन शाम 6 बजे से पहले हो जाना चाहिए। जबकि शास्त्रीय नियमों के मुताबिक विजयादशमी को रात के 1.30 बजे तक विसर्जन किया जा सकता है।

शुक्रवार को जब राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को विसर्जन का समय रात के 10 बजे तक बढ़ाने की जानकारी दी, तब आवेदनकारी पक्ष ने हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस निशिथा म्हात्रे और जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती की खंडपीठ में कहा कि पंजिका के अनुसार विसर्जन की समय सीमा रात्रि 1.30 बजे तक होनी चाहिए।


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इस पर जजों के बेंच ने सरकार के वकील से पूछा कि क्या विसर्जन की समय सीमा को बढ़ाकर रात 1.30 बजे तक किया जा सकता है? कोर्ट ने यह भी पूछा है कि रात 10 बजे कौन ताजिया निकालना चाहता है? सरकारी पक्ष ने इसका जवाब देने के लिए समय मांगा है। कोर्ट ने आगामी सोमवार तक इस प्रश्न का उत्तर देने का निर्देश दिया है।

वर्ष 2011 में राज्य में तृणमूल कांग्रेस के सरकार के पदासीन होने के बाद कई मौकों पर राज्य सरकार को ट्रैक पर लाने के लिए हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा है। पिछले साल भी राज्य सरकार ने कुछ इसी तरह के आदेश जारी किए थे, हालांकि हाईकोर्ट में इस मामले में हस्तक्षेप किया था और इस पूरे प्रकरण को मुस्लिम तुष्टीकरण करार दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इससे पहले कभी विजयादशमी के मौके पर मूर्ति विसर्जन पर रोक नहीं लगी थी।

पिछले दिनों विजयादशमी के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को लेकर राज्य सरकार ने गाइडलाइन्स जारी किए थे, इसके बाद से ही इस पर विवाद शुरू हो गया है। इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट में तीन अगल-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई थी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगते रहे हैं कि वह मुस्लिम तुष्टीकरण को प्रश्रय देती हैं।

चाहे मालदा में दंगे की घटना हो, या बशीरहाट में साम्प्रदायिक हिंसा, तृणमूल कांग्रेस की सरकार हमेशा बहुसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ और मुसलमानों के समर्थन में दिखती है।

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