Advertisement

27 साल तक की मेहनत से खोद दिया तालाब, अब गांव वाले मानते हैं रोल मॉडल

2:27 pm 28 Aug, 2017

Advertisement

दशरथ मांझी का किस्सा हम सबको पता है। मांझी अकेले अपने दम पर पहाड़ को काटकर रास्ता बना डाला था। उनकी कहानी एक व्यक्ति के संकल्प व अदम्य जिजीविषा की कहानी है।

कुछ इसी तरह की कहानी छत्तीसगढ़ के श्यामलाल की है।

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रहने वाले श्यामलाल जब महज 15 साल के थे, तब वह और उनके गांव वाले पानी की किल्लत से दिनरात जूझते थे। न तो ग्रामीणों के खुद के उपयोग के लिए पानी था और न ही मवेशियों के लिए जलाशय की व्यवस्था थी। परेशानियां लगातार बढ़ रही थी, लेकिन ग्रामीणों के पास इस समस्या से निजात का कोई रास्ता नहीं था। अंत में श्यामलाल ने खुद ही तालाब खोदने का फैसला कर लिया। पहले तो ग्रामीण उस पर हंसते थे, लेकिन बाद में वे भी उसके मुरीद हो गए। करीब 27 साल की कड़ी मेहनत के बाद श्यामलाल ने तालाब की खुदाई पूरी कर ली। इस काम में न तो ग्रामीणों ने उसकी मदद की और न ही प्रशासन ने। अब श्यामलाल 42 साल के हैं। यह तालाब करीब 1 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ और 15 फीट गहरा है।


Advertisement

कभी श्यामलाल का मजाक उड़ाने वाले ग्रामीण अब उसे रोल मॉडल मानते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि श्यामलाल के अथक प्रयासों की वजह से आज गांव में तालाब है और मवेशियों के पीने के लिए पानी उपलब्ध हो सका है।

इस बीच, कोरिया जिले के कलेक्टर नरेंद्र दुग्गल ने श्यामलाल को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने का विश्वास दिलाया है। वहीं, स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जयसवाल ने श्याम लाल की इस कड़ी मेहनत के लिए उसे दस हजार रुपए का इनाम दिया।

Advertisement


  • Advertisement