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पिछले 44 सालों से यह डॉक्टर कर रहा है दो रुपए में मरीजों का इलाज

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7:27 pm 30 Oct, 2017

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आज के दौर में इलाज कराने से लेकर दवाइयों का खर्च महंगा हो गया है। जहां सस्ती सुचारू स्वास्थ्य सेवा मिलना दूर का सपना है, वहीं एक डॉक्टर ऐसा भी है जो महज दो रुपए में लोगों का इलाज कर रहा है।

यहां हम बात कर रहे हैं चेन्नई के रहने वाले 67 वर्ष के डॉक्टर थीरुवेंगडम वीराराघवन की, जो पिछले 44 सालों से मरीजों का केवल 2 रुपए लेकर ही इलाज कर रहे हैं। उनकी यह नि:स्वार्थ सेवा 1973 से जारी है।

वीराराघवन ने गरीब और समाज के वंचित वर्ग के लोगों के लिए सस्ती सुलभ चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने हेतु अपना समस्त जीवन समर्पित कर दिया है।

वह सुबह 8 बजे से मरीजों को देखना शुरू कर देते हैं और रात 10 बजे तक मरीजों को देखते हैं। वह इरुकांचेरी और वेश्यारपादी इलाके में मरीजों को देखने के लिए जाते हैं।

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सांकेतिक तस्वीर studying

स्टेनले मेडीकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले वीराराघवन का जीवन संघर्ष भरा रहा है। वेश्यारपादी में अपना अधिकतर जीवन व्यतीत करने वाले वीराराघवन का साल 2015 में आई चेन्नई की बाढ़ में सबकुछ तबाह हो गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने विकट परिस्थितियों का सामना किया और लोगों को अपनी सेवाएं देना जारी रखा।

वह अपने क्लिनिक में वंचित वर्गों का इलाज तो करते ही है, साथ ही वह कुष्ठ रोगियों के घावों को भरने का काम भी करते हैं। अधिकांश चिकित्सक पर्याप्त संसाधनों और एहतियात के अभाव में ऐसे मरीजों को छूने से परहेज करते हैं। वहीं, वीराराघवन इन सबके परे अपना कर्त्तव्य निभाते हुए अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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वीराराघवन को लोग ‘दो रुपए वाले डॉक्टर’ कहकर भी पुकारते हैं। स्थानीय लोग उन्हें पसंद करते हैं। बता दें कि अपने करियर के शुरुआत से ही मरीजों से दो रुपए फीस लेने वाले वीराराघवन ने मरीजों के कहने पर ही अपनी फीस को एक बार दो रुपए से 5 रुपए कर दिया था।

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डॉ. वीराराघवन इतने ज्यादा प्रसिद्ध हो गए कि आस पास के अन्य डॉक्टरों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया। डॉक्टरों ने बतौर फीस कम से कम 100 रुपए लेने को उनसे कहा। ऐसे में नि:स्वार्थ भाव से लोगों का इलाज का प्रण लिए वीराराघवन ने इसका एक अचूक रास्ता निकाला। उन्होंने मरीजों से पैसे लेने बंद कर दिए। अब उन्होंने मरीजों पर छोड़ दिया कि वह उन्हें जितने पैसे देंगे वह उसे स्वीकार करेंगे। अपने इस नेक कार्य को लेकर अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया से अपनी बातचीत में डॉ वीराराघवन ने कहाः

“मैंने डॉक्टर बनने के लिए जो पढ़ाई की उसमें मुझे पैसे नहीं खर्च करने पड़े। यह पढ़ाई उन्होंने समाज की सेवा के लिए की है। मैं पूर्व मुख्यमंत्री के कामराज की नीतियों का शुक्रगुजार हूं, जिसने मुझे मरीजों का नि:शुल्क इलाज करने के लिए प्रेरित किया। मैंने संकल्प लिया था कि मैं अपने पेशे को पैसे कमाने का जरिया नहीं बनाऊंगा।”

वीराराघवन की आय का एक मात्र स्थिर स्रोत का जरिया एक कॉर्पोरेट अस्पताल है, जहां वह बतौर औद्योगिक स्वास्थ्य में एसोसिएट फेलो (AFIH) कार्यरत हैं।

उनके कई साथी सरकारी या निजी अस्पतालों में काम कर रहे हैं और विदेशों में अपने परिवार सहित बसे गए हैं, वहीं दूसरी ओर एक अलग ही सोच के साथ वीराराघवन अपने पथ पर डटे हुए हैं।

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