भगवान विष्णु के 10 अवतार और डार्विन के सिद्धांत में समानता है, आप खुद देख लीजिए

5:27 pm 16 Jun, 2018

धरती पर जीवन की उत्पति को लेकर हिंदू धर्म और विज्ञान के तर्क अलग-अलग हैं। हिंदू धर्म के मुताबिक भगवान ने सृष्टि की रचना की और इंसानों को बनाया। वहीं विज्ञान के अनुसार मनुष्य वानरों का विकसित रूप है। भले ही दोनों के तर्क अलग हों, मगर सृष्टि की उत्पति को लेकर हिंदू धर्म और डार्विन के सिद्धांतों में बहुत समानता हैं। जैसे डार्विन ने कहा था जीवन की शरुआत जल से होती है और हिंदू धर्म भी कुछ ऐसा ही मानता हैं। भगवान विष्णु के दस अवतार और डार्विन के सिद्धांतों में काफी समानताए हैं।

 

1. मत्स्य अवतार

 

भगवान विष्णु का पहला अवतार। मत्स्य यानी मछली अवतार जाहिर है इसकी उत्पति पानी से हुई।  डार्विन के सिद्धांत के मुताबिक भी जीवन की शुरुआत सागर यानी जल से हुई है। डार्विन का मानना था जीवन को बचाने के लिए पानी ही सबसे ज़रूरी चीज़ है।

 

 

2. कच्छप अवतार

 

भगवान विष्णु का दूसर अवतार। कच्छप अवतार। जो पानी और ज़मीन दोनों जगहों पर रह सकता है। डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत के मुताबिक, जीवन पानी से शुरू होकर जमीन की ओर प्रस्थान करता है। इस लिहाज़ से भगवान का कच्छप अवतार और डार्विन के सिद्धांत में समानता है, क्योंकि दोनों ही जल से निकल थल की ओर जाते हैं।

 

 

3. वराह अवतार

 

डार्विन के सिद्धांत के मुताबिक, जल से निकल थल पर रहते-रहते जीवन धरती के लिए अनुकूल हो गया। विकासवाद के क्रम में अब धरती जीवों के प्रजनन के लिए अनुकूल हो गई। हिंदू धर्म के अनुसार विष्णु के तीसरे अवतार वहार थे। धरती पर रहने के लिए और दूर तक जाने के लिए उनके पास पैर भी थे। यानी वह समुद्र से धरती की यात्रा कर सकते थे। ये विकास का तीसरा चरण था।

 

 

4. नरसिंह अवतार

 

डार्विन के सिद्धांत के मुताबिक जानवर से इंसान बनने की प्रक्रिया होती है। मानव पैर पर चलना सीखता है, लेकिन मानसिक विकास नहीं होता। यानी आधा इंसान और आधा जानवर है अभी तक। भगवान विष्णु का नरसिंह अवतार भी कुछ ऐसा ही है, जिसके शरीर का ऊपरी हिस्सा जानवरों जैसा और निचला हिस्सा इंसानों जैसा है।

 

 

5. वामन अवतार

 

डार्विन के सिद्धांत के मुताबिक होमो सेपिंयस के बाद मानव का और विकास हुआ, उसका शरीर तो बौना था, लेकिन बौद्धिक विकास हुआ। भगवान विष्णु का वामन अवतार भी कुछ ऐसा ही था, जिसमें उनके शरीर का आकार तो छोटा होता है, लेकिन दिमाग़ तेज़ रहता है। ये बुद्धि के विकास का क्रम है।




 

 

6. परशुराम अवतार

 

विकास के इस क्रम में मानव का शारीरिक विकास पूरी तरह से हो जाता है। यानी अब वह जानवर से पूरी तरह इंसान बन जाता है और दिमागी विकास भी हो जाता है। इस दौरान गुफाओं में रहने वाले आदिमानव अपनी रक्षा के लिए कुछ औजार रखते हैं। भगवान विष्णु का परशुमार अवतार आदिमानव का प्रतिनिधित्व करता है। उनके पास भी हमेशा एक औजार रहता था और वो आदिमानव की तरह ही गुफाओं में रहते थे। आमतौर पर हिंदू धर्म में परशुराम को एक क्रोधी ब्राह्मण के रूप में जाना जाता है।

 

 

7. रामावतार

 

इस क्रम में मानव का सही विकास हुआ और वो एक-दूसरे की इज्ज़त करने लगे। सही गलत का फर्क समझा। भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम ने एक सभ्य राजा और सभ्य समाज का उदाहरण पेश किया। गांव और समुदाय का विकास हुआ जिसकी रक्षा के लिए तीर-धनुष जैसे औजार विकसित हुए।

 

 

8. कृष्णावतार

 

डार्विन के सिद्धांत के मुताबिक, विकास के क्रम में मानव ने सीखना जारी रखा और आगे चलकर नगर बने। समुदाय में युद्ध हुए। साम्राज्य बने और आज की दुनिया का विकास हुआ। यहां से आधुनिक मानव का वास्तविक विकास हुआ। विष्णु के कृष्ण अवतार की भी भगवान राम की तरह पूजा की जाती है और कृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। श्रीकृष्ण की द्वारिका नगरी के अवशेष खुदाई में भी मिले हैं।

 

 

9. बुद्ध अवतार

 

कलियुग में बुद्ध को भगवान विष्णु का नौंवा अवतार माना गया है, जिन्होंने इंसानों के लिए ज्ञान और मोक्ष प्राप्ति की बात कही। उसी तरह डार्विन ने भी विकास के क्रम में मनुष्यों की ज्ञान प्राप्ति का ज़िक्र किया है।

 

 

10. कल्कि अवतार- दुनिया का अंत

 

आधुनिक विज्ञान और बिग बैंग सिद्धांत के मुताबिक, एक दिन दुनिया का अंत हो जाएगा और फिर से नई जीवन की शुरुआत होगी। हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु का दसवां अवतार कल्कि के रूप में होगा। जब दुनिया में बुराई अपने चरम पर होगी तब कल्कि अवतार लेकर भगवान बुराई का अंत करेंगे। साथ ही इस सृष्टि का भी अंत हो जाएगा और एक बार फिर से धरती पर नई ज़िंदगी की शुरुआत होगी।