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खुदाई में मिले 4 हजार साल पुराने रथ-मुकुट, जानिए इनका महाभारत से क्या है ताल्लुक!

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11:50 am 17 Jul, 2018

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आखिरकार सिनौली साइट ने दुनियाभर के इतिहासकारों का मिथक तोड़ ही दिया। यहां पर चल रहे खनन से पुरातत्वविदों और इतिहासकारों को न सिर्फ़ 5000 साल पुरानी सभ्यता के प्रमाण मिले हैं, बल्कि खनन से प्राप्त महायुगीन रथ और शाही ताबूत में दफन योद्धा की ताम्र युगीन तलवारें, ढाल आदि ने माहाभारत काल के इतिहास के उन पन्नों को खोल दिया है, जिसे आजतक हम सिर्फ किताबों और महाकाव्यों में ही पढ़ते आए हैं।

बागपत का ताल्लुक महाभारत काल से जोड़ा जाता है। सिनौली उसी बागपत जनपद का एक गांव है। बागपत जनपद का उल्लेख महाभारत में वर्णित है। बागपत उन पांच जनपद में से एक है, जिसे पांडवों द्वारा श्रीकृष्ण के माध्यम से कौरवों से संधि के दौरान मांगा गया था।

आज पूरे विश्व के पुरातत्वविदों की नजरें सिनौली पर टिकी हैं।

 

 

2005 में स्थानीय इतिहासकारों की मांग के बाद सिनौली से 120 मीटर की दूरी पर आर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने खनन का काम शुरू किया था। इसमें महायोद्धाओं की एक कब्रगाह मिली थी, जिसमें से लगभग 116 कब्रें मिली हैं। उन कब्रों के पास भी तलवारें आदि मिली थीं। वहीं, इसी साल फरवरी में सिनौली के ही एक स्थानीय व्यक्ति को अपने खेत में तांबे के तीरनुमा कुछ टुकड़े मिले थे।

इस घटना की जानकारी मिलने पर आर्कियॉलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने 15 फरवरी 2018 के बाद से एक बार फिर यहां खुदाई शुरू की। इस अभियान के पहले दिन से ही आश्चर्यजनक पौराणिक चीजें मिलनी शुरू हो गईं।

 

खुदाई में मिला करीब  5000 साल पुराना रथ

 

इस खुदाई का काम देख रहे एएसआई अधिकारी डॉ एस के मंजुल का कहना है कि अभी तक जो तथ्य मिले हैं उससे तो यह लगता है कि यह काल 5000 साल पुराना रहा होगा। यानी लगभग 1800 से 2000 ईसा पूर्व का।


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सिनौली उत्खनन से प्राप्त पुरावशेषों की जानकारी देते डॉ एस के मंजुल ने बताया कि सिनौली के वर्तमान उत्खनन से आठ मानव कंकाल और उनके साथ तीन एंटीना शॉर्ड (तलवारें), काफी संख्या में मिट्टी के बर्तन विभिन्न दुर्लभ पत्थरों के मनकें और सबसे अधिक महत्वपूर्ण और आश्चर्यचकित करने वाला 5000 साल पुराना रथ मिला है।

भारतीय इतिहास के लिहाज के बेहद महत्वपूर्ण

इस खोज को भारतीय इतिहास के लहजे से बेहद महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, क्योंकि विश्व के इतिहासकार भारतीय मानव सभ्यता को लेकर मतभेद रखते हैं। इस खुदाई से प्राप्त  योद्धाओं के शवों के साथ उनके युद्ध रथ, तलवारें, हेलमेट, कवच, ढाल आदि प्राप्त होना 5000 वर्ष प्राचीन युद्धकला का स्पष्ट नमूना पेश करते हैं। मौके पर मौजूद शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने दावा किया कि सिनौली सभ्यता भारतीय संस्कृति और इतिहास को विश्व के पुरातत्वविदों को दोबारा लिखने को मजबूर करेगा।

 

बागपत का इतिहास महाभारत काल से संबंधित है

फिलहाल सिनौली साइट पर पुरातत्वविदों ने खुदाई का काम बंद कर दिया है और यहां से प्राप्त दुर्लभ पुरावशेषों को दिल्ली के लालकिला में पहुंचाया जा रहा है। वहां पर इनको रासायनिक प्रक्रिया से साफ किया जाएगा और फिर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। इस संबंध में डॉ एस के मंजुल ने बताया कि महाभारत महाकाव्य में जनपद बागपत के बरनावा और बागपत नगर व यमुना नदी के दूसरी ओर हरियाणा के सोनीपत, पानीपत नगर को पांडवों द्वारा श्रीकृष्ण भगवान के माध्यम से कौरवों से संधि के दौरान मांगे जाने का उल्लेख है। भौगोलिक रूप से भी यह सिद्ध है कि यह इलाका कुरू जनपद का प्राचीन काल से एक केंद्र रहा है, जिसकी प्राचीन राजधानी हस्तिनापुर और इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) रही है।

 

4000 साल पहले भी यहां थी सभ्यता

2005 के सिनौली में मिले पौराणिक वस्तुओं को गहन रासायनिक विधियों से प्राप्त कार्बन डेटिंग से इस निष्कर्ष तक पहुचा जा सकता है, बागपत में आज से  4000 से 5000 वर्ष पहले मानव सभ्यता विकसित थी। इसलिए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सिनौली से  2005 में जो  मानव शव प्राप्त हुए थे वो महाभारत काल के योद्धाओं के हैं। वहीं, शवों का ताबूत में उनके साजो सज्जा के समान के साथ दफनाना इतिहास की दुर्लभतम प्रक्रिया की तरफ इशारा करता है। इससे महाभारकालीन ताम्र सभ्यता के रहस्यों से पर्दा उठेगा।

 

महाभारत यद्ध की होती है पुष्टि

महाभारत काल का समय  4500 वर्ष पुराना बताया जाता है। सिनौली में जो भी कंकाल मिले हैं, उनके साथ युद्ध में प्रयोग किए जाने वाले हथियार बरामद हुए हैं। इससे यह बात सिद्ध होती है कि ये आम व्यक्ति नहीं, योद्धा थे। चुंकि यह पूरा क्षेत्र महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, इसलिए  ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस खुदाई और खोज के बाद इतिहास के कई पन्नों के रहस्य खुलेंगे।

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