100 साल पहले चलन में रहा ढाई रुपए का यह नोट अब लाखों रुपए में बिका है

1:59 pm 24 Apr, 2018

पुराने सिक्के और नोटों को जमा करना एक आम शौक रहा है। हमारे आस-पास आसानी से ऐसे लोग मिल जाएंगे जो नोटबंदी के बाद भी ऐसा करते हैं। शौक से हटकर पुराने नोट का अपना एक अलग कारोबार है और यह बेहद लाभकारी भी है। इसी का ताजा उदाहरण है कि ढाई रुपए के नोट लगभग 3 लाख रुपए में नीलाम हुए हैं!

 

 

गौरतलब है कि ये नोट 100 साल पहले फरवरी 1918 में ब्रिटिश शासन की ओर से जारी किए गए थे। असल में रुपये में 16 आने होते थे और इस लिहाज से दो रुपये आठ आने के नोट ढाई रुपये के हुए। पहले विश्वयुद्ध की मार झेल रहे ब्रिटिश सरकार ने चांदी की कमी को देखते हुए ये नोट जारी किए थे। ज्ञात हो कि उस समय चांदी के सिक्के चलन में हुआ करते थे।

ये है दो रुपये आठ आने का नोट

यह जानना दिलचस्प है कि अंग्रेजों ने अमेरिकी सरकार के सहयोग से तांबा और निकेल के सिक्के के साथ-साथ 1 तथा ढाई रुपये का नोट जारी किए थे। उस समय सबसे कम वैल्यू का नोट 5 रुपये का हुआ करता था। लिहाजा लोगों ने इस नोट को उतना चलन में रखा नहीं और अंततः सरकार ने महज 8 साल बाद इस नोट को बंद कर दिया। उसी समय 1926 में 1 रुपये के नोट भी बंद कर दिए गए, लेकिन बाद में इसे फिर से जारी किया गया।

 

 




मीडिया रिपोर्ट्स की मानें ढाई रुपये के इसी नोट की नीलामी 2.95 लाख रुपये में हुई है। ब्रिटिश काल में इस नोट की कीमत एक डॉलर के करीब थी। टोडीवाला ऑक्शन हाउस के मालिक मैल्कम टोडीवाला ने बताया कि नोट को संरक्षित करना बेहद मुश्किल काम होता है। इसके गलने और फटने का डर होता है, जबकि सिक्कों के साथ ऐसा नहीं होता। लिहाजा नोट की नीलामी में ज्यादा पैसे मिलने की संभावना होती है।

 

 

कहा गया है कि इस नोट की अधिक कीमत मिल सकती थी, लेकिन जीएसटी, नोटबंदी से ऑक्शन प्रभावित हुआ है। रविवार को हुई नीलामी में स्वतंत्रता से पहले पांडिचेरी और गोवा में प्रचलित मुद्रा के री-1 इंडो-फ़्रांसिसी और इंडो-पुर्तगाली नोट भी सम्मिलित किए गए थे, जिनकी नीलामी क्रमशः 50,000 और 25,000 रुपये में हुई।

 

बताते चलें कि पुराने सिक्के का मूल्य इसकी दुर्लभता और डिमांड पर निर्भर करता है। इसको कलेक्ट करनेवाले इसी को ध्यान में रखकर उन्हें खरीद लेते हैं और व्यावसायिक मुनाफा कमाते हैं।



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