इन देसी लगने वाले खाने का रहा है ‘विदेशी कनेक्शन’, आइए जानते हैं!

11:40 am 7 Jul, 2018

भूख के आगे सभी बेबस और लाचार होते हैं और जो भी खाना मिलता है उसे खा लेते हैं, लेकिन जब बात जायके और उससे जुड़े कल्चर की आती है तो फिर सोचना पड़ता है। आजकल देसी होना कूल माना जाता है और हमारे इर्द-गिर्द बहुत से ऐसे लोग मिल जाएंगे, जिन्हें देसीपने से प्यार है, लेकिन ये जान लेना भी जरूरी है कि आखिर देसी है क्या!

 

देशी खाना।

 

 

स्पष्ट कर दूं कि बात यहां खाने की हो रही है…मुंह में पानी आ जाए तो संभालिएगा!

यहां हम कुछ ऐसे खाने की लिस्ट लेकर आए हैं जिसे आम तौर पर लोग देशी खाना बताते हैं लेकिन वे दरअसल बाहर के हैं।

 

मिर्च

 

 

मिर्च का अपना ही क्रेज है यहां और बिना तड़के के तो बात बनती नहीं है। देसी भोजन में भी इसका प्रमुख स्थान है जो कि खुद अमेरिका,  पुर्तगाल से भारत आई है। तो जनाब मिर्च का लुक भले ही देसी हो लेकिन है ये विदेशी!

 

बिरयानी

 

 

बिरयानी आज के समय में हर दूसरे व्यक्ति का फेवरिट खाना है। पार्टियों की तो ये जान ही कही जा सकती है, लेकिन क्या है कि भैया ये भी विदेशी ही निकली। बता दें कि सबसे पहले तुर्की से पुलाव भारत आया और फिर मुगलों ने इसे बिरयानी के रूप में विकसित कर दिया।

 

चाय

 

 

बिना चाय के तो चांस ही नहीं कि दो लोग बात भी कर लें। चाय अब अपने यहां बड़ा रोल प्ले कर रही है। जो भी मौसम हो इसकी चुस्की में जान है। हरेक मेज की शान बन चुकी ये चाय असल में ब्रिटेन से भारत आई है।

 

जलेबी

 

 

जलेबी के बारे में बताते मुंह में पानी आ ही गया। अब लो बता भी देते हैं कि नुक्कड़ों की शान खासमखास जिलेबी फारस और अरब की देन है। इरान में इसे ‘जालाबिया’ और अरब में ‘जलबिया’ कहा जाता है।

 

मैगी

 

 

चटपट तैयार होने के लिए मशहूर मैगी फिरंगी है। इसका जन्म लगभग 1872 में जर्मनी में हुआ था। उस समय इसे जुलियस मैगी कहा जाता था जो अब स्विट्जरलैंड की कंपनी नेस्ले के कब्जे में है।




 

नान

 

 

नान ऐसी डिश है कि ये सेव-टमाटर से लेकर शाही पनीर तक सभी सब्जियों के साथ खाने में फिट बैठ जाती है। नान ईरान और फारस से होते हुए भारत आई है।

 

आलू

 

 

आलू खाने का जरूरी अवयव है जो कि 17वीं शताब्दी में अमेरिका और पेरू से भारत लाया गया। आश्चर्य की बात है कि उससे पहले आलू नाम की चीज यहां थी ही नहीं!

 

राजमा

 

 

मैक्सिको और ग्वाटेमाला का खाना राजमा कब भारतीयों की फेवरिट डिश बनी बताना मुश्किल है, लेकिन आज ये जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में खूब उगाई जाती है।

 

गुलाब जामुन

 

 

हमारे यहां गुलाब जामुन के नाम से मशहूर ये मिठाई पर्सिया में लुकमत-अल-कैदी कही जाती है। ये भी भारतीय नहीं है और पर्सिया से यहां आकर रच-बस गया है।

 

समोसा

 

 

14वीं शताब्दी में समोसे को संबुस्क के नाम से जाना जाता था, जिसे भारत मुगल लेकर आए थे। उस समय इसमें मीट भरा जाता था लेकिन बाद में इसकी जुगलबंदी आलू के साथ हो गई।

 

टमाटर

 

 

आलू की तरह ही टमाटर की लोकप्रियता है और ये स्पेन से 17वीं शताब्दी में भारत आया था। हालांकि, इसे स्पेन से ज्यादा भारत में अपनाया गया और आज ये देसी समझा जाता है।

 

जो भी हो, खाना तो आखिर खाना होता है। जो सहजता से उपलब्ध हो और जायकेदार हो वो अपना बन ही जाता है।