भारत में कोयले से सस्ती होगी सौर ऊर्जा; यहां बन रहा है दुनिया का पहला सोलर एयरपोर्ट

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7:58 pm 22 Apr, 2016


भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उससे जल्द ही यहां कोयले से पैदा होने वाली ऊर्जा पुरानी बात हो जाएगी। भारत सरकार का मानना है कि वर्ष 2020 तक सौर ऊर्जा कोयले से उत्पादित ऊर्जा से सस्ती हो जाएगी, और भारत इस मामले में दुनिया के सभी देशों से आगे हो जाएगा।

हाल ही में भारत सरकार ने देश में कई महात्वाकांक्षी सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू की हैं, जिसमें दुनिया का पहला 100 फीसदी सौर ऊर्जा से चलने वाला हवाई अड्डा भी शामिल है।

यह हवाई अड्डा दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पावर स्टेशन होगा। भारत सरकार में ऊर्जा मंत्री पीयुष गोयल ने इस बात की पुष्टि की है कि सौर ऊर्जा कोयले से पैदा होने वाली ऊर्जा से सस्ती होगी।

एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहाः

“मुझे लगता है कि कोयले से बिजली उत्पादन का नया संयंत्र सौर ऊर्जा प्लान्ट के मुकाबले महंगा पड़ेगा। यह सही है कि 24 घंटे बिजली देना एक चुनौती है, लेकिन हमने इस चुनौती को स्वीकार किया है। इस मामले में हम दूरदृष्टि वाली नीति अपना रहे हैं, जो सब्सिडी पर आधारित नहीं होगी।”

गौरतलब है कि भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2022 तक 100 गीगा-वाट सौर ऊर्जा के उत्पादन का है। यह महात्वाकांक्षी लक्ष्य मौजूदा सौर ऊर्जा उत्पादन से 20 गुना अधिक है।

यही वजह है कि सरकार यह मान रही है कि भारत में सौर ऊर्जा की गिरती दरें काफ़ी हद तक बिजली उद्योग का स्वरूप बदल सकती हैं।


हाल ही में देश में सौर ऊर्जा ४.३४ रुपए प्रति इकाई की दर से उपलब्ध हुई थी। भारत सरकार की सौर आधारित नीतियों की वजह से जुलाई 2015 के बाद से सौर ऊर्जा की दरें लगातार 5 रुपए से कम ही रही है। जबकि कोयले से उत्पादित ऊर्जा की कीमत 3-5 रुपए प्रति इकाई होती है।

अगर सौर ऊर्जा की कीमतें इसी तरह कम होती रहीं तो वर्ष 2020 तक यह कोयले से पैदा होने वाली बिजली से कम से कम 10 फीसदी सस्ती हो जाएगी।

यही नहीं, भारत में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की लागत भी 5 करोड़ रुपए प्रति मेगावाट से कम हो गई है। कुल मिला कर, सौर ऊर्जा की खरीद दरें और संयत्र स्थापित करने की लागत, दोनों ऊर्जा के अन्य पारम्परिक स्रोतों, कोयला और गैस जितनी सस्ती होती जा रही हैं।

अगर सब कुछ भारत सरकार की योजनाओं के अनुरूप रहा तो देश में बिजली की समस्या का पूरी तरह निदान हो जाएगा। माना जाता है कि देश में 30 करोड़ लोगों तक अब भी बिजली नहीं पहुंची है।

सौर ऊर्जा प्लान्ट के ग्रिड कोयला ऊर्जा प्लान्ट के ग्रिड की तुलना में अधिक भरोसेमंद होते हैं। यही नहीं, इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 20 प्रदूषित शहरों में भारत के 13 शहर हैं। फिलहाल भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा भाग, यानि कि 60 फीसदी कोयले से उत्पादित बिजली से पूरा होता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में पाए जाने वाले कोयले से छाई की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसके जलाने से टॉक्सिन और दूसरे हानिकारक पदार्थ पर्यावरण में मिल जाते हैं।

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