AOL विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के लिए उजाड़ दिए गए हरे-भरे खेत!

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8:37 pm 10 Mar, 2016

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का विश्व सांस्कृतिक महोत्सव खूब चर्चा में रहा। किसी ने यमुना को नुकसान होने की बात उठाई, तो किसी ने आर्मी द्वारा पुल बनाए जाने की निंदा की, लेकिन इन सब के बीच एक अहम सवाल गुम हो गया। यूं कह सकते हैं कि मीडिया और महोत्सव का विरोध कर रहे नेताओं और बुद्धिजीवियों को ये सवाल जरूरी ही नहीं लगा।

सवाल था यमुना के किनारे खेती करने वाले मजदूरों का, जिनके फसल लगे खेतों को उजाड़ दिया गया। मुआवजे के नाम पर प्रति बीघा उन्हें मिले महज 4000 रुपए।

 

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यमुना नदी के किनारे बसे खेतिहर मजदूर आमतौर पर बटाई यानि दूसरों की जमीन पर खेती करते हैं। यमुना के किनारे की जमीन उपजाऊ है। यहां अधिकतर सब्जियां उगाई जाती हैं। हर 6 महीने में एक तय रकम उन्हें जमीन के मालिक को देनी होती है।

लेकिन इस बार श्री श्री रविशंकर के विश्व सांस्कृतिक महोत्सव ने इनकी खेती चौपट कर दी है। इनके हरे-भरे खेतों पर बुलडोजर चलवाकर उसे समतल कर दिया गया है। आरोप है कि मजदूरों ने विरोध करने की कोशिश की, तो उन्हें पुलिस और प्रशासन की धौंस दी गई।

 

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मंहगाई की मार से पहले ही परेशान मजदूरों के लिए यह किसी वज्रघात के कम नहीं है। महोत्सव की चमक को धूमिल कर रही मजदूरों की झोपड़ियों को परदों से घेर दिया गया है।

इस गम में किसी मजदूर ने चार दिन से खाना नहीं खाया है, तो कोई हफ्ते भर से बात ही नहीं कर रहा है। आंखें रो-रोकर सूख गई हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

 

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यहां खेती करने वाले महेन्द्र ने बतायाः

मैं 15 बीघे में खेती करता हूं मैंने गेहूं और सब्जियां लगाई थी। बाबा के लोगों ने आकर कहा कि ये खेत समतल किए जाएंगे। मेरे इन्कार करने पर उन्होंने पुलिस और प्रशासन का धौंस दिखाया। जितनी लागत है उसका आधा मुआवजा दिया गया है।

 

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मजदूर नन्हे ने बताया कि इस बार उन्होंने सोचा था कि फसल होने के बाद वह अपना कर्ज उतार पाएंगे, लेकिन इस नुकसान के बाद अब कर्ज और बढ़ जाएगा। वह 11 बीघे पर खेती करते थे, जिन खेतों में कोई फसल नहीं लगी थी, उन खेतों का उपयोग मुफ्त में किया जा रहा है।

इसी तरह, ढ़ाई बीघा में मजदूरी करने वाले शंकर ने बताया कि उनकी ककड़ी और प्याज की खेती को उजाड़ दिया गया, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है।

 

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इसमें कोई दो राय नहीं है कि आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर ने यमुना नदी के किनारे चमचमाता भव्य स्टेज बनाया है, लेकिन बाबा के इस कार्यक्रम के लिए गरीबों ने भारी कीमत चुकाई है।

 

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