हाजी अली दरगाह के भीतर अब जा सकेंगी महिलाएं, बॉम्बे HC ने हटाया प्रतिबंध

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12:42 pm 26 Aug, 2016


मुंबई के मशहूर हाजी अली दरगाह में अब महिलाएं भी भीतर तक जा सकेंगी। अपने ऐतिहासिक फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दरगाह के अंदर में स्थित गर्भगृह पर ट्रस्ट की तरफ से लगाए गए पाबंदी को गैर जरूरी बताया।

कोर्ट ने इस प्रतिबंध को हटा लिया है। इसके साथ ही अब महिलाएं भी दरगाह में चादर चढ़ा सकेंगी।

इस मामले की सुनवाई दो जजों की जस्टिस वीएम कनाडे और जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे की खंडपीठ कर रही है। इस मामले की पैरवी वरिष्ठ वकील राजीव मोरे याचिकाकर्ता जाकिया सोमन, नूरजहां सफिया नियाज की तरफ से कर रहे हैं।

नियाज ने अगस्त 2014 में अदालत में याचिका दायर कर यह मामला उठाया था।

राजू मोरे ने अदालत के इस फैसले की जानकारी देते हुए कहाः

“कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को हटा लिया है। अदालत ने इसे असंवैधानिक माना है। दरगाह ट्रस्ट ने कहा है कि वो हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।”

याचिकाकर्ता जाकिया सोमन ने इस फैसली पर खुशी जताई है। जाकिया ने इसे मुस्ल‍िम महिलाओं को न्याय की तरफ एक कदम करार दिया।

वहीं, दूसरी तरफ भूमाता ब्रिगेड की तृप्ति देसाई ने फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है।

एमआईएम के हाजी रफत ने कहा कि हाई कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए था, लेकिन अब जब फैसला ही गया है तो वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।

गौरतलब है कि यह मामला लंबे समय से कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से इसे सुलझाने के लिए कहा था। लेकिन दरगाह ट्रस्ट किसी भी सूरत में महिलाओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं देने पर तुले थे।

दरगाह के ट्रस्ट का कहना है कि यह प्रतिबंध इस्लाम का अभिन्न अंग है और महिलाओं को पुरुष संतों की कब्रों को छूने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।

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