राष्ट्रीय एकता के सर्वोत्तम प्रतीक ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ से जुड़े 10 बेहतरीन तथ्य

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11:42 am 13 Apr, 2016


पिछले एक हजार साल में विदेशी आक्रमणों और संस्कृति के अवमूल्यन के परिणामस्वरूप विखंडित राष्ट्रीय एकता को पुनः सूत्रबद्ध करने का संकल्प लेकर स्वामी विवेकानंद ने समूचे भारत को ‘राष्ट्रीयता’ की भावना से चैतन्ययुक्त किया।

भारत को पुनः विश्वगुरु के रूप में स्थापित और नाना प्रकार से असंगठित भारत को जोड़ने का वैचारिक आवेग लिए स्वामी जी ने पूरे भारत का भ्रमण किया। लेकिन उन्हें इस दुर्गम काज को करने की कोई स्पष्ट योजना नहीं सूझ रही थी।

अंततोगत्वा वे भारतवर्ष के सबसे अंतिम सिरे कन्याकुमारी पहुंचे, जहां बीच समुद्र में एक शिला पर उन्होंने तीन दिन तक अखंड ध्यान किया। इसी शिला पर ध्यान करते हुए उन्हें ‘भारत निर्माण’ की प्रेरणा मिली।

हम आपको इस ‘शिला’ जिसे बाद में ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ के रूप में विकसित किया गया, से जुड़े 10 बेहतरीन तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं।

1. एकता और पवित्रता का अद्वितीय प्रतीक विवेकानंद शिला स्मारक दक्षिण भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। इस स्मारक का उदघाटन 2 सितम्बर 1970 को तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी.गिरि द्वारा किया गया।

2. जनवरी 1962 में स्वामी विवेकानंद जी के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य पर ‘विवेकानंद शिला स्मारक समिति’ का गठन किया गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह के दायित्व से मुक्त होकर एकनाथ रानाडे ने इस समिति के प्रमुख संयोजक का पदभार संभाला।

3. एकनाथ रानाडे के मार्गदर्शन में 6 नवम्बर 1964 को ‘स्मारक’ का निर्माण कार्य शुरू किया गया। समुद्र के बीचों-बीच स्थित शिला पर दो हेलीपैड और नावों की व्यवस्था की गई।

इस प्रकार स्मारक को प्राथमिक रूप से पूर्ण होने में करीब 3 साल का समय लगा।

4. चूंकि इस स्मारक का निर्माण राष्ट्रीय एकता की भावना को पल्लवित करने के लिए किया जा रहा था। अतः इसके निर्माण में सरकार के साथ-साथ आम लोगों के सहयोग की रूपरेखा समिति (VRM) द्वारा बनाई गई। इसके लिए ‘वन रुपीज फोल्डर’ का अभियान देश भर में चलाया गया।

5. समिति के द्वारा देश की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में ‘वन रुपीज फोल्डर’ अभियान टिकट छपवाई गईं। यह अभियान पूरे देश में काफी सफल रहा। स्मारक समिति द्वारा आधिकृत रूप से 50 लाख टिकटें छपवाई गईं और करीब 30 लाख लोगों ने 1, 3 और 5 रुपए का दान ‘स्मारक निर्माण’ के निमित्त किया।

इस अभियान की सफलता का अंदाजा आप इससे ही लगा सकते हैं कि अकेले मध्यप्रदेश से उस समय 11 लाख रुपए और उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र से 15 लाख रुपए इकट्ठा किए गए।

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6. सांस्कृतिक समरसता और राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने को समर्पित विवेकानंद शिला स्मारक ने निर्माण के दौरान हर तरह की राजनीति का सामना किया। क्षेत्रवाद और तुष्टीकरण के कुत्सित हथकंडों के बावजूद शिलास्मारक को देश भर से जबर्दस्त समर्थन मिला।

एकनाथ रानाडे के प्रयासों से उस समय के संस्कृति मंत्री हुमायूं कबीर और कई चर्चों को जन भावनाओं के सामने झुकना पड़ा। दरअसल, ये स्मारक निर्माण को साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा बता रहे थे।

7. इस स्मारक के निर्माण के सरकारी समर्थन के लिए एकनाथ रानाडे ने 323 सांसदों से हस्ताक्षर लेकर सहमति प्राप्त की। दक्षिणपंथी संगठन माने जाने वाले RSS के प्रचारक रहे रानाडे के इस कदम का समर्थन वामपंथी संगठनों के सांसदों ने भी किया।

प्रख्यात समाजवादी डॉ. राममनोहर लोहिया और साम्यवादी नेताओं में रेणु चक्रवर्ती आदि ने स्मारक के निर्माण का खुलकर समर्थन किया।

8. कांची पीठ के स्वामी परमाचार्य जी की सलाह पर ‘देवकोट्टई’ के एस.के.अचारी को इस स्मारक निर्माण परियोजना का मुख्य अभियंता और आर्किटेक्ट नियुक्त किया गया।

स्मारक के निर्माण में तकरीबन 6000 टन ग्रेनाइट और 7, 83,767 मानव दिनों का इस्तेमाल किया गया।

9. विवेकानंद शिला स्मारक में स्थित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का निर्माण प्रतिष्ठित आर्ट स्कूल जे.जे.स्कूल ऑफ़ आर्ट के प्रसिद्द मूर्तिकार ‘सोनवाडेकर’ ने किया था।

एकनाथ रानाडे ने इस मूर्ति के निर्माण के पूर्व मूर्तिकारों को विवेकानंद दर्शन पढ़ने का सुझाव दिया, जिससे मूर्ति में विवेकानंद जी जीवंत प्रतीत हो सकें।

10. एकनाथ रानाडे का उद्देश्य स्मारक निर्माण से कहीं अधिक स्वामी जी के विचारों के प्रसार को लेकर था। शिला स्मारक निर्माण के दो वर्ष बाद उन्होंने ‘विवेकानंद केंद्र’ की स्थापना की।

हर वर्ष करीब 12 लाख से अधिक लोग इस शिला स्मारक के दर्शन के लिए आते हैं। यह केंद्र इन सभी पर्यटकों की आवश्यक जरूरतों की पूर्ति करता है। विवेकानंद केंद्र के द्वारा विभिन्न भारतीय भाषाओं में स्वामी जी से जुड़े साहित्यों का संपादन और प्रकाशन किया जाता है।

विवेकानंद केंद्र ने राष्ट्रनीति को सबल करने की दिशा में कार्य करते हुए एक शक्तिशाली थिंकटैंक संगठन ‘विवेकानंद इन्टरनेशनल फाउंडेशन(VIF) की भी स्थापना की। इसके अलावा केंद्र के द्वारा पूर्वोत्तर में शिक्षा के प्रसार के लिए काफी सारे उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।

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