उत्तराखंड के जंगलों की आग बनेगी ग्लेशियर्स के तेजी से पिघलने की वजह !

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4:30 pm 3 May, 2016


उत्तराखंड के जगंलों में लगी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। करीब 2800 हेक्टेयर जंगल आग की चपेट में आ चुका है। इस वजह से यहां का वन्य-जीवन भीषण आग की चपेट में गया है। अब तक यहां 7 लोगों की मौत हो गई है और करीब 15 लोग घायल हुए हैं।

जंगल में फैलती आग को काबू करने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर जुटे हुए हैं। इसके अलावा एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राज्य पुलिस और वन विभाग की कई टीमें भी इस कार्य में लगी हुई हैं।

विशेषज्ञों ने उत्तराखंड में हुई इस विकराल आग की घटना के कारण ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की चेतावनी दी है।

ग्लेशियर उत्तरी भारत में बहने वाली प्रमुख नदियों की जीवन रेखा हैं।

विशेषज्ञों ने कहा है कि धुंध से निकला ब्लैक कार्बन और राख ग्लेशियर्स को ढक रहे हैं, जिससे ग्लेशियर्स के पिघलने का खतरा बढ़ रहा है।

ARIES में वायुमंडलीय विभाग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक मनीष कुमार ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा:


“ब्लैक कार्बन जीवाश्म ईंधन, जैव ईंधन और बायोमास के अधूरे ज्वलन से बनता है। यह प्रकाश को सोखकर गर्मी को बढ़ाता है। यही कारण है कि इस घटना की वजह से ग्लेशियर्स तेजी से पिगल सकते है। इसके अलावा, पानी हानिकारक कणों के कारण दूषित हो जाएगा, जिस वजह से वातावरण में ब्लैक कार्बन की मात्रा और बढ़ जाएगी।”

उल्लेखनीय है कि इस आग की वजह से पहले से ही उत्तरी भारत में 0.2 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में वृद्धि हुई है, जिसका असर आगे आने वाले मॉनसून पर भी दिखाई पड़ सकता है।

अल्मोड़ा के गोविन्द बल्लभ पंत इंस्टिट्यूट ऑफ़ हिमालयन टेक्नोलॉजी की वैज्ञानिक किरीट कुमार का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में, ग्लेशियर्स दर्पण की तरह कार्य करते हुए प्रकाश और ऊष्मा को परावर्तित करता है। जिसे एल्बिडो कहा जाता है। लेकिन जब ग्लेशियर्स पर ब्लैक कार्बन जमा हो जाता है, तो वह वातावरण के प्रकाश और ऊष्मा को सोखना शुरू कर देता है।

यही वह कारण है जिसे ग्लेशियर्स का पिघलना शुरू होता है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।

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