असाध्य रोगों के लिए रामबाण हैं तुलसी के ये 11 गुणकारी उपाय

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1:23 pm 16 May, 2016


पुरातन काल से अनगिनत भारतीय आंगनों की शोभा बढ़ाने वाली ‘तुलसी’ को यदि प्रकृति प्रदत्त ‘वैद्य’ की संज्ञा दी जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय प्रयोगों का विशेष स्थान हैं। तुलसी को संजीवनी बूटी के समान माना जाता है।

तुलसी का इस्तेमाल बहुधा हम सभी धार्मिक कार्यकालापों में करते हैं, लेकिन इन सबके पीछे इसके महान औषधीय गुणों का भडार है। हमारे चिर पुरातन ग्रंथों यथा अथर्ववेद, पुराणों और आरण्यकों आदि में तुलसी के गुणों एवं उसकी उपयोगिता का विशद वर्णन मिलता है।

तुलसी सारे शरीर का शोधन करने वाली जीवन शक्ति संवर्धक औषधि है, जो वातावरण का भी शोधन करती है तथा पर्यावरण संतुलन बनाती है। इस लेख में हम आपको तुलसी के कुछ घरेलु नुस्खे बताएंगे, जिसे अपनाकर आप कई ‘असाध्य’ और पुराने रोगों से मुक्ति पा सकते हैं।

1. टीबी रोग को भगाए दूर

तुलसी दमा और टीबी रोग में अत्यंत लाभकारी है। तुलसी के नियमित सेवन से दमा, टीबी नहीं होता। यह बीमारी के जिम्मेदार कारक जीवाणु को बढ़ने से रोकती है। चरक संहिता में तुलसी को दमा की औषधि बताया गया हैं। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। चरक संहिता में तुलसी के इस गुण के बारे में इस तरह लिखा गया हैः

गौरवे शिरसः शूलेपीनसे ह्यहिफेनके । क्रिमिव्याधवपस्मारे घ्राणनाशे प्रेमहेके ॥

2. मलेरिया की तो खैर नहीं

तुलसी की 11 पत्तियों का 4 खड़ी कालीमिर्च के साथ सेवन करके, मलेरिया एवं मियादी बुखार ठीक किया जा सकता हैं। मच्छरों से जुडी लगभग सभी बीमारियों का इलाज तुलसी के भीतर छिपा हुआ है।

3. अब बुखार के लिए ‘नो पैरासिटामॉल’

सभी प्रकार के ज्वरों के नाश के लिए बीस तुलसी दल एवं दस काली मिर्च मिलाकर क्वाथ पिलाने से पुराने से पुराना ज्वर तुरन्त उतर जाता है। किसी भी तरह के बुखार को बगैर पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक के उपयोग के भी ठीक किया जा सकता है।

4. तुलसी लगाओ कुष्ठ मिटाओ

तुलसी की जड़ को पीसकर, सोंठ मिलाकर जल के साथ प्रात: पीने से कुष्ठ रोग निवारण का लाभ मिलता है। कुष्ठ रोग में तुलसी पत्र स्वरस प्रातः पीने से लाभ होता देखा गया है। आयुर्वेदाचार्यों के मुताबिक़ तुलसी के बगीचे के आस-पास रहने वाले लोगों को ‘कुष्ठ’ रोग होने की संभावना ‘नगण्य’ हो जाती है।

5. माइग्रेन और साइनस में मिलती है राहत

यदि पुराने सर दर्द से परेशान हैं तो प्रातः काल और शाम को एक चौथाई चम्मच भर तुलसी के पत्तों का रस, एक चम्मच शुद्ध शहद के साथ नित्य लेने से 15 दिनों में रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है। तुलसी का काढ़ा पीने से माइग्रेन और साइनस में आराम मिलता है।

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6. आंखों के रोगों की रामबाण औषधि

श्यामा तुलसी के पत्तों का दो-दो बूंद रस 14 दिनों तक आंखों में डालने से रतौंधी ठीक हो जाती है। आंखों का पीलापन ठीक होता है। आंखों की लाली दूर करता है। तुलसी के पत्तों का रस काजल की तरह आंख में लगाने से आंख की रोशनी बढ़ती है।

7. सभी वात रोगों का करती है शमन

गठिया के दर्द में तुलसी के पंचाग (जड़, पत्ती, डंठल, फल, बीज) का चूर्ण बनाएं। इसमें पुराना गुड़ मिलाकर 12-12 ग्राम की गोलियां बना लें। सुबह शाम गाय या बकरी के दूध के साथ सेवन करने से गठिया व जोड़ों के दर्द में लाभ होता है।

8. किडनी के रोगों में भी है लाभकारी

किडनी की पथरी में तुलसी की पत्तियों को उबालकर बनाया गया जूस (तुलसी के अर्क) शहद के साथ नियमित 6 माह सेवन करने से पथरी मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है।

9. प्रबल विषनाशक है ‘तुलसी’

तुलसी के प्रत्येक हिस्से को सर्प विष में उपयोगी पाया गया है। सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति को यदि समय पर तुलसी का सेवन कराया जाए तो उसकी जान बच सकती है। जिस स्थान पर काटा हो उस पर तुलसी की जड़ को मक्खन या घी में घिसकर उस पर लेप कर देना चाहिए जैसे-जैसे ज़हर खिंचता चला जाता है इस लेप का रंग सफ़ेद से काला हो जाता है। काली परत को हटाकर फिर ताजा लेप कर देना चाहिए।

10. तुलसी से ह्रदय को मजबूत बनाइये

तुलसी के दस पत्ते, पांच काली मिर्च और चार बादाम गिरी सबको पीसकर आधा गिलास पानी में एक चम्मच शहद के साथ लेने से सभी प्रकार के हृदय रोग ठीक हो जाते हैं। तुलसी की 4-5 पत्तियां, नीम की दो पत्ती के रस को 2-4 चम्मच पानी में घोट कर पांच-सात दिन प्रातः ख़ाली पेट सेवन करें, उच्च रक्तचाप ठीक होता है। परन्तु यह नुस्खा केवल शीत ऋतू में ही अपनाएं।

11. दांपत्य सुखों के लिए करें तुलसी का सेवन

नपुसंकता से ग्रसित रोगों में तुलसी बीज के चूर्ण अथवा मूल सम भाग को पुराने गुड़ के साथ मिला कर नित्य डेढ़ से तीन ग्राम की मात्रा में गाय के दूध के साथ 5-6 सप्ताह तक लेने से पूर्णलाभ होता देखा गया है।

नोट- उपरोक्त में से किसी भी उपायों को करने से पूर्व अपने ‘चिकित्सक’ से सलाह अवश्य लें।

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