देवनगरी हरिद्वार के बारे में 24 आश्चर्यजनक तथ्य

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5:54 pm 21 Aug, 2015

हरिद्वार हिन्दुओं के लिए सात पवित्र धार्मिक स्थानों में से एक है। आमतौर पर मान्यता है कि यह देवताओं तक पहुंचने का प्रवेशद्वार है। यही वह जगह है, जहां आदिगंगा हिमालय की पर्वत-श्रृंखलाओं से उतर कर इस धऱती को जलायमान करती है। प्रति सप्ताह हजारों की संख्या में यहां श्रद्धालु आकर गंगा की पवित्र धारा में स्नान करते हैं और शाम के वक्त गंगा आरती में भाग लेते हैं।

 

हरिद्वार एक ऐसी जगह है, जहां के कोणों, घाटों के साथ कोई न कोई दंतकथा जरूर जुड़ी है। कथाएं तो यहां जैसे बिखरी पड़ी हैं। यही वजह है कि श्रद्धालु भले ही कई बार इस पावन नगरी का दौरा करते हैं, लेकिन यहां के संबंध में बहुत थोड़ा जानते हैं।

अगली बार अगर आप यहां आएं तो इन पर जरूर ध्यान दें।

1. पर्वतों के नीचे तराई में हरिद्वार ही वह पहला स्थान है, जहां पवित्र नदी गंगा का अवतरण होता है।

सतयुग में राजा भागिरथी के अथक प्रयासों की वजह से गंगा पृथ्वी पर आकर उनके पूर्वजों के पापों को धोने को तैयार हुईं।

 

2. हरिद्वार की नगरी उन चार स्थानों में से एक है, जहां कुम्भ मेला का आयोजन किया जाता है।

अन्य तीन स्थान हैं। इलाहाबाद, नाशिक  और उज्जैन । महा कुम्भ का आयोजन 12 वर्ष में एक बार अलग-अलग स्थानों पर किया जाता है।

 

3. प्रतिदिन शाम को सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु हर की पौरी में जमा होते हैं और देवी गंगा की प्रार्थना, आरती करते हैं।

श्रद्धालु दीए जलाकर गंगा में प्रवाहित करते हैं। यह दृश्य अभिनव होता है। हर की पौरी का शाब्दिक अर्थ भगवान शिव के पदचिह्न होता है।

 

4. हरिद्वार अपने स्ट्रीट फूड के लिए भी मशहूर है।

यह इतना सस्ता और सुलभ है कि आप एकबारगी विश्वास नहीं कर सकेंगे। हरिद्वार की पुरानी गलियों में आप हर तरह के लोकल फूड का जायका ले सकते हैं।

 

चाट-पपड़ी से शुरू करिए और जलेबी और बादाम के साथ दूध से खत्म। अगर आपके पेट में अब भी जगह बची हो तो फिर कुल्फी और फालूदा का जायका लीजिए। सच में, मजा आ जाएगा।

मोहनजी पूड़ीवाले की आलू पूड़ी और कश्यप कचौड़ीवाले की कचौड़ियों का जायका लेना मत भूलिए। अगर बेहतरीन मिठाई का स्वाद चखना हो तो फिर मथुरा वालों की प्राचीन दुकान तक जा सकते हैं।

5. हरिद्वार की नगरी योगाभ्यास करने वालों के लिए मक्का है।

यहां एक से एक योग के आश्रम हैं, जहां एडवान्स बुकिंग की जा सकती है।

 

6. यह नगरी योग गुरू बाबा रामदेव की कर्म भूमि है।

हरिद्वार में दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट विश्वविद्यालय है। यहां पतंजलि योगपीठ का मुख्यालय भी है।

 

7. रोप वे, जिसे यहां उड़न खटोला भी कहा जाता है, का इस्तेमाल करते हुए आप चंडी देवी और मनसा देवी के मंदिरों तक जा सकते हैं।

 

8. मान्यता है कि हरिद्वार पर पहाड़ी पर स्थित मनसा देवी के मंदर में जाने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है।

अगर आप सच्चे मन से देवी से कुछ मांगेगे तो वह आपकी ईच्छा पूरी करती हैं।

 

9. मंदिर, भगवान और देवताओं के दर्शन हो गए हों तो अब अपर रोड मार्केट में थोड़ी खरीदारी भी की जाए।

मोतीबाजार के सामने आपको दुकानों की लम्बी लाईन मिलेगी, जहां से आप हस्तशिल्प की सामग्रियां खरीद सकते हैं। ऊनी कपड़े या फिर दूसरे सजावटी सामान, यहां सबकुछ उपलब्ध है।

 

10. हरिद्वार का ऐतिहासिक मोती बाजार उतना ही पुराना है, जितना की यह शहर।

बाजार में खरीदारी के दौरान ही आप जलेबी, छोले-भटूरे और रसगुल्लों का आनन्द ले सकते हैं।

 

11. इस पावन नगरी में स्थित सैकड़ों छोटे-बड़े मंदिरों के बीच में 13वीं सदी में निर्मित एक प्रसिद्ध दरगाह भी है।

इसे पीरन कलियार के नाम से जानते हैं। कहा जाता है कि इस खूबसूरत दरगाह को इब्राहीम लोदी ने बनवाया था। यहां सूफी संत अलाउद्दीन अली अहमद सबीर कलयारी को दफनाया गया था।


 

12. शांतिकुंज आने पर आपको पता चलता है कि हरिद्वार में न केवल हिन्दुत्व की जड़ें गहरी हैं, बल्कि यह शहर आयुर्वेद का भी है।

शांतिकुंज को आयुर्वेद पर अनुसंधान के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। समस्त विश्व के कल्याणार्थ एक यज्ञ का आयोजन यहां हमेशा चलता रहता है।

 

13. पुराने जमाने के तांगा या टुक-टुक रिक्शा पर चढ़ने का शौक है तो हरिद्वार आपके लिए बेहतर जगह है।

हरिद्वार दुनिया का संभवतः अंतिम शहर बचा है, जहां तांगा और तांगेवाले अब भी आपको मिल जाएंगे। अगर आप चाहें तो पूरे दिन के लिए तांगा किराए पर ले सकते हैं और पूरा शहर देख सकते हैं।

 

14. हरिद्वार का परदेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग पारे का बना हुआ है।

पारे का बना शिवलिंग अपने आप में दुर्लभ है। माना जाता है कि बलुआ पत्थर से निर्मित यह मन्दिर सूर्योदय से ठीक पहले और सूर्यास्त के ठीक बाद विस्मयकारी और रहस्यमयी प्रतीत होता है। यह मन्दिर अपने रूद्राक्ष के वृक्ष की वजह से भी बेहद चर्चित है।

 

15. एकान्त की तलाश में आए लोग बिरला घाट पर चले जाते हैं। यह हरिद्वार के सबसे पुराने घाटों में से एक है।

हर की पौरी से बिपरीत यहां शांति, नीरवता होती है।

 

16. यहां एक मन्दिर भारत मां को समर्पित है।

इसे भारत माता का मन्दिर कहा जाता है।

 

17. कुशवार्ता घाट के बारे में मान्यता है कि यहां महात्मा दत्तात्रेय ने अपने एक पैर पर हजारों सालों तक खड़े होकर तप किया था।

इसी घाट पर लोग दिवंगत आत्माओं की की मुक्ति और शांति का अनुष्ठान भी करते हैं।

 

18. यहां दक्ष प्रजापति का मन्दिर।

यह उस प्रसिद्ध स्थान पर बनाया गया है, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां राजा दक्ष ने उस यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें सती ने खुद को भस्म कर लिया था। यज्ञ की जिस अग्नि में सती ने खुद का दाह कर लिया था, वह अग्नि अब भी जल रही है।

 

19. हरिद्वार में माता वैष्णो देवी के मन्दिर की एक प्रतिमूर्ति भी है।

अगर आप कटरा स्थित वैष्णो देवी मंदिर जाने से चूक गए हों, तो यहां जाकर दर्शन करना एक अच्छा मौका साबित हो सकता है।

 

20. हरिद्वार में शनिदेव का मंदिर अपने आप में अभिनव है। यहां शनिदेव एक स्तम्भ के रूप में हैं।

इस स्थल पर 12 अलग-अलग देवताओं के स्तम्भ हैं, जिनकी पूजा-अर्चना की जाती है।

 

21. हरिद्वार दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है। इसके बारे में कहा जाता है कि इस नगरी की स्थापना ईशा से 1700 साल पहले हुई थी।

चीनी साहित्यकार ह्वेन सांग ने 629 ई. में इस शहर के बारे में लिखा था। इस चित्र में आप गंगा किनारे एक साधु को बांसुरी बजाते हुए देख सकते हैं।

 

22. इस शहर को 1886 ई. में रेल नेटवर्क से जोड़ दिया गया था।

उस दौर में भारत के लोग बैलगाड़ियों और तांगों पर सफर करते थे। हरिद्वार में रेल की पटरी 1886 में पहुंची और इसे 1900 तक देहरादून ले जाया गया।

 

23. हरिद्वार के और भी कई नाम हैं, जैसे कपिलस्थान, गंगाद्वार और मायापुरी।

 

24. हरिद्वार के संबंध में मान्यता है कि यह चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार है।

जो श्रद्धालु चार धाम की यात्रा पर जाना चाहते हैं, उन्हें अपनी यात्रा हरिद्वार से ही शुरू करनी होती है।

 

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