17 सुझाव उन बेचारे मर्दों के लिए जो माँ और पत्नी के बीच हुई तकरार में खुद पिस जाते है।

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4:48 pm 16 Oct, 2015

एकता कपूर की बदौलत हम सब जानते है कि “सास भी कभी बहु थी” लेकिन उन बेचारे बेटों का क्या जो सास-बहु की तू-तू, मैं-मैं में पिस जाते है। आखिरकार कैसे वो अपनी ज़िन्दगी को नर्क होने से बचाएं, और अपने घर पर शांति का अनुभव कर सकें। यह सब इतना आसान तो नहीं है, लेकिन घुटने न टेकते हुए आप कई ऐसे तरीके अपना सकते हैं, जो वास्तव में कारगर साबित हो सकते हैं।

1. सबसे सरल तरीका – एक कान से सुनो और दूसरे कान से निकाल दो। इससे आपका दिमाग भी ठंडा रहेगा और आप दूसरे कामों में भी अपना मन लगा पाएंगे।

इस तरह से आप आसानी से दोनों पक्षों को सुन सकते है वो भी बिना झंझट।
ignore the conflict

2. कौन सच्चा है, सच क्या है इसकी तह तक जाने की कोशिश भी न करें। क्योंकि ऐसी परिस्थिति में सच जैसा कुछ नहीं होता।

3. उनमें से किसी एक को भी नीचा महसूस मत कराओ। इस बात को सुनिश्चित करें कि दोनों को ही आपका स्नेह मिले।

4. कभी भी अपनी पत्नी को ये न बोलें कि आपकी माँ उनकी पीठ पीछे आलोचना करती हैं।

इस बात को गाँठ बाँध के रख ले। और इसके विपरीत माँ से भी कुछ न बोलें।

5. अपनी माँ को ये विश्वास दिलाएं कि अभी भी आप उनके वही बेटे हैं जो शादी से पहले थे। अपनी माँ को आश्वस्त करें कि आप में शादी के बाद कोई बदलाव नहीं आया है।

आप हमेशा उनके लाड़ले बेटे रहेंगे।

6. आपकी पत्नी अपने माता-पिता को छोड़ आपके घर अपनी नई दुनिया बसाने और एक नए परिवार को अपनाने आती है। इसका मतलब यह नहीं कि वह अपने माता-पिता का सम्मान और उन्हें प्यार करना छोड़ दे। उनकी भावनाओं की क़द्र करें।

अपनी माँ को अपनी पत्नी के माता-पिता की आलोचना और उनकी परवरिश पर ऊँगली उठाने से रोकें।

7. अपने परिवार को खुश करने के लिए अपने वैवाहिक जीवन के आनंद को भेंट मत चढ़ने दो।

अगर आपकी पत्नी हनीमून पर जाना चाहती है तो आपको ज़रूर जाना चाहिए और उनके साथ अपनी इस यात्रा का आनंद उठाना चाहिए। अगर आप इस मामले में अपनी माँ को दखल करने की अनुमति देते हैं, तो इससे आपकी शादीशुदा ज़िन्दगी शुरू होने सी पहले ही बिगड़ने की कगार पर आ खड़ी हो सकती है।

8. कभी भी जज बन मामले को सुलझाने की भूल न करे।

 ऐसे में सुनिश्चित तौर पर आप सूली पर लटका दिए जाओगे।
do not be judge

9. इस बात का ख्याल रखें कि कोई एक किसी दूसरे की लगातार आलोचना से उसे आहत न कर दे और अपने रिश्ते की मर्यादा को न लांघे।

 आपको पता होना चाहिए कि कब आपको मर्यादा की वह लकीर खींचनी है।

10. अपनी पत्नी को यह बात समझाएं कि आपकी ज़िन्दगी का अहम हिस्सा बनने के साथ ही वह आपकी परंपराओं का भी हिस्सा बन गई है।

 वही आप भी उनके लिए करें।

11. अगर आपकी पत्नी आपकी माँ की मर्ज़ी के खिलाफ जाकर मायके चली जाती है, तो फिर एक ही रास्ता है, किचन में माँ का हाथ बटाएं और उनकी गपशप का हिस्सा बनें।

12. अगर वह अपने मामलों को आपस में सुलझा सकती हैं तो उन्हें अपने मामलों को अपने तरीके से सुलझाने दें।


उनकी आपसी तकरार में न पड़ें। आप खुद को तकरार से दूर रख सकते है।

13. इस मामले में अपने पिता की समझदारी को कम मत आंकना।

वह अपने खुद के तजुर्बों से आपकी मदद कर सकते है।

14. अपनी पत्नी के साथ बीता रहे उन ख़ास पलों में अपनी माँ को बीच में दखल न देने दें।

15. कभी-कभी उनके कार्यों को उचित ठहराने के लिए उनकी दलीलों की अनदेखी करें।

16. इस बात का ख्याल रखे कि आपकी पत्नी को हमेशा ये आभास हो कि आपकी ज़िंदगी में उनकी क्या ख़ास अहमियत है। और यह भी कि आप हमेशा उनके साथ रहेंगे।

17. जब भी हो शांति से भरे आनंदमय वातावरण की सरहाना करें।

शिकार करना इतना लोकप्रिय नहीं होता अगर आदमियों को यह नहीं लगता कि शिकार करना माँ और पत्नी के बीच की लड़ाई में पड़ने से कहीं ज़्यादा आसान है।

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