महाराष्ट्र में वर्ष 2015 में 1,000 किसानों ने की खुदखुशी

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5:40 pm 22 Jan, 2016

महाराष्ट्र में किसानों की दुर्दशा बेहद ही दयनीय है। राज्य सरकार ने बीते दिन बॉम्बे हाई कोर्ट को यह जानकारी दी कि साल 2015 में महाराष्ट्र में 1000 किसानों ने आत्महत्या की।

सरकार ने किसानों के हित के लिए कई योजनाएं पेश की, जिसपर कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि आत्महत्याओं की संख्या बढ़ी है या घटी हैं। इसी सवाल के जवाब में सरकार की तरफ से यह आंकड़ा सामने आया है।

किसानों की मौत के मामले पर कोर्ट अब खुद संज्ञान ले रही है। यह संज्ञान एक जनहित याचिका के रूप में लिया गया है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि किसानों को लेकर जो योजनाएं बनाई गई है, उन्हें मात्र कागज़ तक ही सिमित न रखा जाए, उन योजनाओं को अमल में भी लाया जाए। अब तक मीडिया रिपोर्ट्स में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा 600 बताया जा रहा था, लेकिन सरकारी वकील अभिनंदन वाग्यानी ने यह जानकारी दी है कि यह आंकड़ा 600 को पार करता हुआ 1000 तक जाता है।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी बताया कि नेशनल ब्यूरो ऑफ क्राइम रिकॉर्ड्स के माने तो बीते 5 सालों में महाराष्ट्र में 15,978 किसानों ने आत्महत्या की है।

कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) का हो उपयोग

कोर्ट ने इस मसले पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि सरकार को किसानों की बढ़ती आत्महत्या को रोकने के लिए कॉर्पोरेट जगत का उपयोग करना चाहिए। कॉर्पोरेट जगत के लोग या तो गांवों को गोद ले सकते है या फिर किसानों को खेती के लिए पर्याप्त साधन, उपकरण मुहैया कराने में मदद कर सकते हैं।

जस्टिस नरेश पाटिल और गिरीश कुलकर्णी की न्यायपीठ ने कहा-

“इस तरह से अगर व्यापारिक घराने किसानों की मदद के लिए अपनी कॉरपोरट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी के तहत आगे आएंगे, तो आत्महत्याएं कम करने में मदद मिलेगी।”

सामूहिक खेती का सुझाव

कोर्ट ने सामूहिक खेती का उपाय भी सरकार के सामने रखा, जिससे छोटी ज़मीन वाले किसानों को मदद मिल सकती है, जो अपनी ज़मीनों से खेती की लागत भी निकालने में सक्षम नहीं है।

मुआवजे में हो बढ़ोतरी

कोर्ट ने सरकार को यह भी सुझाव दिया कि किसानों को मिलने वाले मुआवजे को 1 लाख से बढ़ाकर 5 लाख तक कर देना चाहिए। ताकि ज़रूरतमंदों किसान की फसल को नुकसान पहुँचने पर वह दोबारा खेती शुरू कर पाए।

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