टेक्नोलॉजी के अत्यधिक उपयोग से कहीं आप डिजिटल उपकरणों के लत के शिकार तो नहीं?


आज हम डिजिटल युग में जी रहे हैं। ऐसा युग, जिसमें टेक्नोलॉजी और इंटरनेट हमारे अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं। इनके बिना जीवन व्यतीत कर पाना बेहद मुश्किल है। टेक्नोलॉजी और इंटरनेट के अति उपयोग से होने वाले ‘डिजिटल स्वाहा’ या अंग्रेज़ी में ‘डिजिटल बर्नआउट’ के दुष्परिणाम बहुत ही भयावह हैं।

सरल शब्दों में कहें तो टेक्नोलॉजी और इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग करने की वजह से लंबे समय से जो पेशागत स्ट्रेस या दबाव उत्पन्न होता है, उसकी वजह से काम न कर पाने की स्थिति को ‘डिजिटल स्वाहा’ या ‘डिजिटल बर्नआउट’ कहा गया है।

सोचिए अभी तो यह डिजिटल क्रांति की शुरुआत है, जहां आज हर हाथ में स्मार्टफोन है। बेशक़ डिजिटल क्रांति ने रोजमर्रा की ज़िंदगी में सहूलियत प्रदान की है, लेकिन इसके बदले इंसान के काम करने की सक्रियता भी प्रभावित हुई है।

डिजिटल स्वाहा के सन्दर्भ में इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि जब सारे काम टेक्नोलॉजी से किए जा रहे हैं तो आपके काम करने की क्षमता और इच्छा या मनोवृत्ति दोनों बेअसर होते जा रहे हैं। इसलिए टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। एक लंबे वक़्त तक काम को हाथ न लगाना पड़े और वह काम अपने आप होता रहे तो आप उस काम को करने की क्षमता और उसमें रूचि, दोनों खोते जाते हैं।

डिजिटल बर्नआउट किसी जोखिम या किसी रोग से कम नहीं है, लेकिन अच्छी बात यह है कि कुछ समाधान रिसर्च द्वारा सामने आए हैं  जो आपको टेक्नोलॉजी और इंटरनेट के आदी होने की समस्या से एक हद तक छुटकारा दिला सकता है।

1. इंटरनेट डेटा और वाई-फ़ाई हमेशा ऑन न रखें

ऐसा हम मोबाइल डाटा के साथ अक्सर करते हैं कि जरूरत के बाद ऑफ़ कर देते हैं लेकिन वाई-फाई हम प्रयोग के बाद भी ऑन ही किए रहते हैं। या कई बार अनलिमिटेड डाटा भी हमेशा ऑन किए रहने की आदत बन जाती है। ऐसा करने से बचें, ये आपको किसी भी वक़्त बुलाकर इन्टरनेट की दुनियां में खींच ले जाते हैं।

2. मल्टी-टास्किंग से बचें

कई रिसर्च ये साबित कर चुकी हैं कि एक साथ कई काम करने की आदत से आपके काम करने की कुशलता पर असर पड़ता है इसलिए बेहतर होगा कुछ काम करते वक़्त आप अपने ई-मेल्स, मेसेज और नोटिफिकेशन ऑफ़ कर दें।

3. डिजिटल दुनियां के बाहर नए शौक ढूंढे

सिर्फ काम ही नहीं, हमारा आराम या मनोरंजन का वक़्त भी टेक्नोलॉजी की कैद में है। हम आराम करते वक़्त पूरी तरह से इसके कब्जे में रहते हैं। इससे बचने के लिए बेहतर होगा हम टेक्नोलॉजी के बाहर अपने शौक खोजें, वो चाहे कोई मैदान का खेल हो सकता है या घर में ही बैठकर किताब पढ़ना, ड्रॉइंग बनाना या कैरम खेलना। ऐसी आदतें आपको न सिर्फ आदी होने से बचाए रखेंगीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखेंगीं।

4. डिजिटल मीडिया प्रयोग की समय-सीमा निर्धारित करें

डिजिटल स्पेस में रहना आज की जरूरत है, लेकिन बने रहने की आदत समस्या का रूप ले लेती है। इससे बचने के लिए हम इसके प्रयोग का समय निर्धारित कर सकते हैं, जैसे दिन में तीन बार आप अपडेट लेने के लिए इंटरनेट पर जाएंगे और एक निर्धारित समय ही बिताएंगे।

यकीन मानिए, असल दुनिया आपके स्मार्टफोन की दुनिया से कहीं ज़्यादा खूबसूरत है। हम उम्मीद करते हैं आप अपने रोजमर्रा की ज़िंदगी में यह कुछ अहम बदलाव करके ‘डिजिटल स्वाहा’ नाम के इस ख़तरनाक रोग से मुक्ति पा सकते हैं।

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