तमिलनाडु सरकार ने पेश किया कर मुक्त बजट, वहीं राज्य का किसान हाथ में कटोरा लेकर जंतर मंतर पर खड़ा है

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10:36 pm 17 Mar, 2017


तमिलनाडु के वित्त मंत्री डी. जयकुमार ने 16 मार्च को साल 2017-18 का पहला करमुक्त बजट पेश किया है। सरकार ने राजस्व घाटे के बावजूद इस बजट में आम आदमी पर कोई नया कर नहीं लगाया है।

मुख्यमंत्री ई. पलनीस्वामी के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके सरकार का यह पहला बजट रहा। वित्त मंत्री ने अनुमानित राजस्व व्यय 1,75,293 तथा राजस्व घाटा 15,939 करोड़ रुपए बताया है, जबकि बजट में 1,59,363 करोड़ रुपए कुल राजस्व प्राप्ति का अनुमान किया गया है।

जयकुमार ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2016-17 में टांजेडको का 22,8 15 करोड़ रुपए के कर्ज का भी भुगतान किया, इस कारण वित्तीय घाटा तमिलनाडु राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम के नियम (राज्य सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत) से अधिक हो गया।

बजट पेश करते हुए उन्होंने राज्य में पड़े सूखे को लेकर भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खराब मानसून के कारण तमिलनाडु में बारिश की 62 फीसद कमी रही और शहर की पानी की जरूरत को पूरा करने वाले जलाशय में 10 से 20 फीसद ही पानी बचा हुआ है। ऐसे में इस सरकार के समक्ष सबसे गंभीर चुनौती है पीने के पानी की जरूरत को पूरा करना।


आपको बता दें कि तमिलनाडु में किसानों की स्थिति में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर किसान भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे पी अय्याकन्नु ने बताया कि प्रदर्शन में तमिलनाडु के अलग-अलग जिलों से किसान यहां केंद्र सरकार से गुहार लगाने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि यह भूख हड़ताल 100 दिनों तक जारी रहेगी।

हाथ में मिट्टी का बर्तन लिए, नंगे बदन ये किसान जंतर-मंतर पर मदद की उम्मीद के साथ खड़े हैं।

किसानों ने अपनी दुर्दशा बताते हुए कहा कि लगातार 10 सालों से राज्य सूखे की मार झेल रहा है। वहीं, पिछले दो सालों में स्थिति सबसे खराब रही है। किसानों का कहना है कि उन्हें फसलों का भारी नुकसान हुआ है। उनके पास खाना तक नहीं है। हालात इतने बदतर हैं कि किसानों के परिवार चूहे और सांप खाने को मजबूर हैं।

किसानों की मांगों में से सबसे महतवपूर्ण मांग है ऋण माफी। इस वजह से राज्य में बड़ी तादाद में किसान आत्महत्या कर चुके हैं। साथ ही किसानों ने मांग की है कि तमिलनाडु को सूखे से बचाने के लिए कावेरी नदी को संरक्षण दिया जाए। यही नहीं, कृषि  उत्पादों को उचित मूल्य और जलमार्ग परियोजना के तहत नदियों को जोड़ने का कार्य भी किया जाए।

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