यह है अपना मालगुडी डेज का स्वामी

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9:42 am 8 Sep, 2015

क्या आपको मालगुडी डेज याद है? 80 के दशक का यह बेहतरीन टीवी सीरीज महान कथाकार आर. के. नारायण के द्वारा रचित उपन्यास पर आधारित था। उन दिनों टीवी हमारे देश में उच्च-मध्यवर्ग परिवारों का हिस्सा हुआ करता था। क्रेज इतना कि हममें से कई लोग अपने पड़़ोसियों के घर जाकर टीवी देखने का जुगाड़ कर लेते थे। और रोमांच इतना कि हम खुद को छोटे से कस्बाई शहर मालगुडी से आत्मीय तौर पर जोड़ लेते थे।

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खैर, अगर आपने मालगुडी डेज देखी होगी, तो आपको स्वामी जरूर याद होगा। जी हां, इस टीवी सीरीज का नायक। इस किरदार को निभाने वाले अभिनेता का नाम है मंजूनाथ नायकर। कलाकारी ऐसी कि खुद आर. के. नारायणन ने कहा था कि उन्होंने जिस स्वामी की परिकल्पना की थी, वह छोटे परदे पर अवतरित हो गया।

मंजूनाथ नायकर ने छोटी उम्र में ही सफलता के सभी मुकाम हासिल किए। हालांकि, 68 कन्नड़, तेलुगू, हिन्दी, अंग्रेजी और कश्मीरी फीचर फिल्मों में काम करने के बाद सिर्फ 19 साल में मंजूनाथ ने फिल्मों की दुनिया से संन्यास ले लिया। एक साधारण इन्सान के तौर पर अपना जीवन व्यतीत करने के लिए।

मंजूनाथ नायकर वही हैं, जिन्होंने अमिताभ बच्चन की फिल्म अग्निपथ में विजय दीनानाथ चौहान के बचपन का किरदार भी निभाया था।

मैसूर विश्वविद्यालय और बेंगलोर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक और समाजशास्त्र में स्नात्तकोत्तर की पढ़ाई करने के बाद नायकर एक फुल-टाइम पब्लिक रिलेशन प्रोफेशनल बन गए। और उन्होंने फिल्मी दुनिया की तरफ कभी मुड़कर नहीं देखा।


उनका लिंक्डइन प्रोफाइल इस बात की ताकीद करता है कि वह फिलहाल बेंगलोर के वीआईसी लि. में प्रिन्सिपल कन्सलटेन्ट के तौर पर जुड़े हुए हैं।

उनका एक पांच साल का बेटा है और वह पारिवारिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं

एक वेबसाइट क्विंट के साथ बातचीत में नायकर ने बताया कि मालगुडी डेज में अभिनय करने के दौरान उन्हें नारायणन की कृतियों और उनकी गुणवत्ता के बारे में जानकारी नहीं थी। जब वह बड़े हुए, तब जाकर उन्हें इन सब चीजों के बारे में पता चला।

मंजूनाथ कहते हैं कि उन्होंने अब तक आर के नारायणन की प्रसिद्ध कृति स्वामी एंड फ्रेन्ड्स नहीं पढ़ी है। क्योंकि उन्हें लगता है कि इस किताब को पढ़ने के बाद शायद उन्हें लगे कि उन्होंने स्वामी के किरदार के साथ न्याय नहीं किया।

खैर, यह अच्छी बात है कि इस देश में एक आदमी ऐसा भी है जो अपने बचपन के दिनों में सफलता की ऊंचाई छू लेने के बावजूद रंग, रोशनी और अंधेरे के तिलिस्म से बाहर निकल आया। वह आज एक साधारण, लेकिन सफल जीवन व्यतीत कर रहा है।

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