निर्भया के नाबालिग रेपिस्ट की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

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2:42 pm 21 Dec, 2015

सुप्रीम कोर्ट ने दिसम्बर 2012 दिल्ली गैंगरेप मामले में नाबालिग रेपिस्ट की रिहाई को चुनौती देने वाली दिल्‍ली महिला आयोग की याचिका खारिज कर दी। आधे घंटे चली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी नाबालिक को तीन साल से अधिक जेल में रखा जाए। इसके साथ ही निर्भया के नाबालिग रेपिस्ट की रिहाई पर कानूनी मुहर लग गई है।

सुप्रीम कोर्ट की अवकाशीय खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दोषी को रिहा नहीं करके उसके मानवाधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। उसे दो साल के लिए सुधार और पुनर्वास पर भेजने की बात पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषी नाबालिग को तीन साल की सजा के अंदर ही सुधार और पुनर्वास के लिए भेजा जा सकता है।


मामले पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्याय व्यवस्था को कानून के खिलाफ जाने का अधिकार नहीं है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि अब तक इस कानून में संशोधन क्यों नहीं किया गया।

फिलहाल जो हालात हैं, उसमें राज्यसभा अगर इस बिल को पास भी कर दे, तो भी निर्भया के नाबालिग रेपिस्ट को रिहाई से रोका नहीं जा सकता।

दिल्‍ली गैंगरेरप के गुनहगार इस नाबालिक को रविवार को रिहा कर दिया गया था। उसकी सुरक्षा को देखते हुए उसे एक एनजीओ को सौंपा गया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसे नाबालिग के मौजूदा ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं है।

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