हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्णित 7 महिलाएं, जिन्होंने पुरुषों से डटकर लोहा लिया।

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2:53 pm 27 Sep, 2015

कई सदियों से यह मिथ्या अवधारणा चली आ रही है कि महिलाएं, पुरुषों की सेवा के लिए ही जन्मीं हैं। दुनिया के लगभग हर देश में पुरूष प्रधान सोच हावी है। भारत भी इसका अपवाद नहीं है। हालांकि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि खाप पंचायतें और दूसरे पुरूष प्रधान संस्थाएं महिला अधिकारों के बारे में क्या विचार रखते हैं। दरअसल, भारतीय समाज के पास आदिकाल से ऐसे कई तथ्य हैं, जो रुढिवादी सोच का विरोध करते हैं। यहाँ हम हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्णित उन महिलाओं का जिक्र करने जा रहे हैं, जिन्होंने ऐसी रूढ़िवादी सोच को गलत साबित किया।

1. माँ दुर्गा

‘अजेय’ माँ दुर्गा से श्रेष्ठ शायद ही कोई हो सकता है, जिससे इस लेखन की शुरुआत की जाए। पुराणों में उल्लेख है कि जब सारे देवता मिलकर दानव महिषाशुर का वध करने में असमर्थ रहे, तब माँ दुर्गा ने आदि शक्ति के रूप में जन्म लिया।

उन्होंने महिषाशुर का वध किया और संपूर्ण विश्व और तीनो लोकों को बुराई, असुरों के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।

Maa Durga

2. वाचकन्वी गार्गी

गार्गी ने पुरूष प्रधान युग और समाज अपने लिए स्थान का निर्माण किया था। वैदिक काल में गार्गी ने केवल वैदिक साहित्य का अध्ययन किया, बल्कि इस क्षेत्र में वह सर्वश्रेष्ठ थीं। वैदिक साहित्य में गार्गी को विशिष्टतम दार्शनिक कहा गया है।

मान्यता है कि गार्गी ने महान ऋषि याज्ञवल्क्य को आत्मा से संबंधित विषयों और इसे जुड़े सिद्धांतों को लेकर शास्त्रार्थ की चुनौती दी थी। गार्गी और याज्ञवल्क्य के बीच आत्मा को लेकर हुआ शास्त्रार्थ पुराणों में अतुलनीय माना जाता है। वह राजा जनक के दरबार में नवरत्नों में से एक थीं। गार्गी प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘गार्गी संहिता’ की लेखक भी थीं।

Gargi Vachaknavi

3. उर्वशी

उर्वशी देवताओं के राजा इंद्र के दरबार में सबसे सुन्दर अप्सरा थीं जो आकांक्षा और सौंदर्य का प्रतीक थीं। उनके नाम की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों से हुई है, उर और वाशी। उर का अर्थ ‘हृदय’ और ‘वाशी’ का अर्थ है ‘जो नियंत्रित करता हो।’ शायद एक मात्र वही ऐसी महिला थीं जिन्होंने अपनी लैंगिकता को गर्व और साहस के साथ संजोके रखा और किसी के अधीन नहीं हुई।

उर्वशी को मनुष्य के भाँति जीवन व्यतीत करने का केवल एकमात्र अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने पहले से ही विवाहित राजा से विवाह रचाया। उनकी और राजा पुरुरवा की प्रेम गाथा वाकई अतुलनीय है।


Urvashi

4. शकुंतला

ये उनकी धृष्टता ही थी कि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति से प्रेम किया जो उन्हें एक गुजरते हुए पल की तरह भूल गया। बल्कि उन्होंने एक पल भी न सोचते हुए उस व्यक्ति के लिए अपने सम्मान को जोखिम में ड़ाला और उनकी संतानों को जन्म दिया। वह भी तब, जब उन्होंने विवाह की रस्म नहीं निभाई थी।

हालांकि, जब उसी व्यक्ति ने शकुंतला के आचरण पर सवाल उठाए, तो उन्होंने विनम्रता से इसका प्रतिरोध किया। इसलिए शकुंतला को एक आदर्श महिला के रूप में जाना जाता है, जो न केवल एक अच्छी प्रेमिका बल्कि एक शोभायुक्त महिला भी थीं।

Skakuntala

5. सीता

जी हाँ, हिन्दू धर्म में सीता को “आदर्श नारी” के रूप में देखते हैंय़ उन्हें एक ऐसी नारी के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने सुखमय रहन-सहन और राजसी ठाट का त्याग कर अपने पति का उनके संकट के समय साथ दिया। उन्होंने सब कुछ त्यागकर, घने जंगलों में 14 साल तक वास किया।

हालांकि, इसी दौर में सीता को कई कठिनाइयों से गुजरना पड़ा था। उन्हें अपनी पवित्रता साबित करने के लिए अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा था। लेकिन ऐसा करने के पश्चात वह अपने पति भगवान राम के पास नहीं लौटीं थी।

Sita

6. द्रौपदी

द्रौपदी ने कुंती माता के कथन का सम्मान करते हुए सभी पाण्डवों को पति के रूप में स्वीकार किया, लेकिन जब उनके पति युधिष्ठिर ने उन्हें जुए में दांव पर लगाया और हार गए। चीर-हरण के लिए उन्हें भरी सभा में घसीटा गया, तब उन्होंने अपनी विनम्रता और चुप्पी का परित्याग कर दिया।

उन्होंने प्रतिशोध की मांग की। ऐसा प्रतिशोध जिसमें संपूर्ण कौरव राजवंश का विनाश निहित था। अगर द्रौपदी ने न्याय और प्रतिशोध की मांग नहीं रखी होती, तो शायद महाभारत की कथा नी लिखी गई होती।

Draupadi

7. काली

यह सूची सशक्तिकरण और शक्ति की देवी माँ काली के बिना अधूरी है। कई अवतारों में माँ काली को पूजा जाता है। माँ काली एक उदार निर्माता है, जिन्होंने भगवान शिव के साथ संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की।
वह केवल निर्माता ही नहीं, बल्कि एक रक्षक और साथ ही साथ एक विध्वंसक भी है। उन्हें देवी माँ के साथ-साथ कोप की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। और यही वह कारण जिसकी वजह से यह सूचि उनके वर्णन के बिना अधूरी है।
Kali

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