शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं को पूजा करने का मिला अधिकार

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5:05 pm 8 Apr, 2016


महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर की 400 साल की पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए मंदिर ट्रस्ट ने महिलाओं को चबूतरे पर चढ़ने, पूजा करने की अनुमति दे दी है। शनि शिंगणापुर ट्रस्ट ने कहा कि अब महिलाएं बिना किसी रोक-टोक के चबूतरे पर चढ़कर शनि भगवान की पूजा कर सकेंगी और उन्हें तेल चढ़ा सकेंगी।

इससे पहले आज गुडी प़डवा के मौके पर प्रशासन की रोक के बावजूद पुरुषों ने मंदिर के चबूतरे पर चढकर शनि को तेल अर्पित किया और मुख्य शिला को स्नान कराया।

गौरतलब है कि महिलाओं की चबूतरे पर पूजा की मांग के बाद से छिड़े विवाद के कारण मंदिर प्रशासन ने पुरुषों के भी चबूतरे पर जाने पर रोक लगा दी थी।

सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई के नेतृत्व में भूमाता ब्रिगेड की महिलाएं कई महीनों से चबूतरे पर पूजा की अनुमति के लिए आंदोलन कर रही थी।

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सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई hindustantimes

कई बार वह जबरन चबूतरे पर जाने की कोशिश भी कर चुकी हैं। मंदिर प्रशासन के इस फैसले को तृप्ति देसाई ने महिलायों की जीत करार देते हुए कहा:


“भूमाता ब्रिगेड की यह बहुत बड़ी जीत है। आज हम शनि प्लेटफार्म पर जा कर पूजा करेंगे। हमें कई बार धमकियां मिली, लेकिन हम नहीं झुके। आज इस आंदोलन से जुड़ी हर महिला की जीत हुई है।”

वहीं खुद मंदिर प्रशासन ने भूमाता ब्रिगेड की नेता तृप्ति देसाई को खासतौर पर पूजा का न्योता भेजा है।

याचिकाकर्ता नीलिमा वर्तक ने भी इसे अच्छा फैसला करार दिया। उन्होंने कहा कि यह देर से लिया गया फैसला है। अब हर जगह पूजा के लिए इजाजत देनी चाहिए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर कहा था कि महाराष्ट्र में महिलाओं को किसी मंदिर में प्रवेश लेने से नहीं रोक सकते। पूजा स्थल पर जाना उनका मूल अधिकार है। इसकी हिफाजत राज्य सरकार को करनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने प्रदेश के हिंदू मंदिरों में एंट्री को लेकर बने 1956 के एक्ट का हवाला देते हुए कहा था कि अगर कोई शख्स या मंदिर ट्रस्ट किसी को मंदिर जाने से रोकता है, तो उसे 6 महीने की जेल हो सकती है। वहीं, किसी भी महिला या पुरुष को मंदिर जाने से रोका जाए तो स्थानीय अधिकारी से इसकी शिकायत की जा सकती है।

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