कश्मीर हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों को बेरहमी से पीटा, 1500 से अधिक घायल

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11:29 pm 21 Jul, 2016

‘गर फ़िरदौस बर रुए ज़मीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त’

इसका मतलब है ‘धरती पर अगर कहीं ‘स्वर्ग’ है ,तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है।’ ये शब्द कभी जहांगीर ने कश्मीर की खूबसूरती के लिए कहे थे। आज वही कश्मीर हिंसा की आग में झुलस रहा है। फूलों की घाटी में पत्थर बरसाए जा रहे हैं।

बुरहान वानी की मौत के बाद से घाटी में पसरी हिंसा की स्थिति को कवर करने के दौरान मीडिया ने अपना ध्यान प्रदर्शनकारियों की तरफ ही अधिक केन्द्रित रखा। इस बात को तवज्जो दी गई कि प्रदर्शन के दौरान कितने प्रदर्शनकारियों की मौत हुई या कितनों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

लेकिन इसी बीच सेना, वहां सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों की बात कोई क्यों नहीं करता! यह बात क्यों नहीं उठाई जाती कि सुरक्षा कर्मी किन हालातों में वहां स्थिति को संभाल रहे है या फिर वे किन हालातों का सामना कर रहे हैं।

Injured soldier

गंभीर रूप से घायल हुआ सुरक्षा बल का यह जवान।

यह वास्तव में सच है कि घाटी में सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में कई कश्मीरी युवक घायल हुए हैं। लेकिन जैसा कि हर सिक्के का दूसरा पहलू भी होता है, इसी तर्ज पर दूसरे पहलू को तवज्जो नहीं दी गई।

Injured soldier

कई सुरक्षाबल कर्मियों की हालत गंभीर।


घाटी में जारी इस हिंसा में कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदर्शनकारियों की एक हिंसक भीड़ ने एक जम्मू-कश्मीर पुलिस वाले का पीछा किया और उसे बुरी तरह पीटा।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, एसएसपी श्रीनगर के निजी सुरक्षा अधिकारी शफाकत अहमद को प्रदर्शनकारियों ने घेर कर पीटा। प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन को आग के हवाले कर दिया और जानबूझकर आंखों पर चोट पहुंचाई। शफाकत का श्रीनगर स्थित आर्मी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनकी आंखों में गंभीर चोट आई हैं।

Injured Soldier

अस्पताल में एक जवान का इलाज होते हुए।

जहां मीडिया का एक वर्ग हिंसक भीड़ पर पैलेट गन की उपयोगिता करने पर सवाल उठा रहा है, वहीं मुश्किल से उन लोगों की ओर उंगलियां उठाई जा रही है, जो सुरक्षाकर्मियों पर पथरबाजी कर रहे हैं।

सुरक्षाबलों का पैलेट गन के उपयोग को लेकर कहना है कि इसके अलावा उनके पास कोई और रास्ता भी नहीं है, क्योंकि भीड़ इनके ऊपर ग्रेनेड और पत्थर फेंक रही है। बेकाबू भीड़ ने जीप समेत पुलिसकर्मियों को नदी में फेंक दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 11 दिनों में लगभग 1500 सुरक्षा बल के जवान हिंसा में घायल हुए हैं।

इनमें से जो ज्यादा गंभीर हैं, उनका इलाज आर्मी अस्पताल में चल रहा है। ब्रिगेडियर एम.एस. तेवतिया ने कहा, ’28 सीआरपीएफ जवानों का ऑपरेशन किया जा चुका है, जों गंभीर रूप से जख्मी थे।’

उन्होंने बताया कि एक पुलिसकर्मी का ऑपरेशन करने में डॉक्टरों को 8 घंटे लग गए। उनके चेहरे पर कई फ्रैक्चर थे।

Injured Soldier

हिंसा के दौरान कई सुरक्षा कर्मी हुए घायल।

हिंसा का फायदा उठाते हुए उग्र भीड़ ने कथित तौर पर एक पुलिस स्टेशन से बड़ी तादाद में हथियार लूट लिए। तब किसी ‘विशेषज्ञ’ या ‘आजादी के हमदर्दों’ने कोई आवाज नहीं उठाई।

जहां सुरक्षाकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं वहीं अलगाववादी घाटी में सामान्य स्थिति की वापसी नहीं होना देना चाहते।

भीड़ ने उस वक्त भी सुरक्षा कर्मियों पर हमला किया जब वह राहत अभियान में लगी हुई थी। इसी बीच, श्रीनगर में 12 वें दिन भी कर्फ्यू जारी है।

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