गुजरात के समुद्र में मिला समुद्र मंथन वाला ‘मन्दराचल पर्वत’, वैज्ञानिकों ने की पुष्टि

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7:47 pm 28 Feb, 2016

देवताओं और असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन की कथा हम सभी जानते हैं। इस कथा के अनुसार देवताओं व असुरों ने नागराज वासुकी की नेती बनाकर मंदराचल पर्वत की सहायता से समुद्र को मथा था। समुद्र मंथन से ही लक्ष्मी, चंद्रमा, अप्सराएं व भगवान धन्वन्तरि अमृत लेकर निकले थे। लेकिन अगर आप यह विचार रखते हैं कि पौराणिक कथाए सिर्फ़ काल्पनिक हैं, तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।

जी हां, आर्कियोलॉजी और ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने मंदराचल पर्वत खोज निकाला, जिससे समुद्र मंथन हुआ था। यह पर्वत मिला, गुजरात के निकट समुद्र में। यही नहीं वैज्ञानिक परीक्षण के बाद इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है।

विष्णु पुराण और भागवत पुराण में मंदराचल पर्वत का ज़िक्र है। सूरत से लगे पिंजरात गांव के समुद्र में यह पर्वत स्थित है। इस पर्वत के बीचों-बीच नाग देवता की आकृति भी मिली है।

सूरत के आॉर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी ने पर्वत का कार्बन टेस्ट का परीक्षण किया, तो नतीज़े चौंकाने वाले थे। क्योंकि सामान्यतः समुद्र में पाए जाने वाले पर्वत ऐसे नहीं होते।


हालांकि, इस पर्वत की खोज 1988 में ही कर ली गई थी। तब डॉ. एस.आर.राव इस साइट पर शोधकार्य कर रहे थे और मितुल त्रिवेदी उनके सहयोगी थे। लेकिन तब इस बात का कोई प्रमाण नहीं था कि यह समुद्र मंथन वाला ही पर्वत है।

800 मीटर की गहराई में जाने के बाद और इस पर्वत की संरचना के गहन अध्यन के बाद यह प्रमाणित होता है कि यह वही पर्वत है, जिसे समुद्र मंथन के लिए इस्तेमाल किया गया था। यह पर्वत समुद्र में पाए जाने वाले पर्वतों से भिन्न है। इस पर्वत मे ग्रेनाइट की मात्रा बहुत है।

ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट इस खोज के बाद बहुत उत्साहित दिखा। इस संबंध में ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने इस तथ्य की पुष्टि अपनी वेबसाइट पर आधिकारिक रूप से भी साझा की।

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