7 परम अलौकिक भारतीय नगर जहां बसती है ईश्वरीय शक्ति

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1:30 pm 21 Dec, 2015

भारत आध्यात्मिकता और धार्मिक प्रतिबद्धता का देश है। यहां की धरती न केवल ईश्वर को पाने के लिए उनकी भक्ति में लीन हो जाने का केंद्र है, बल्कि मंगल भाव का प्रतीक भी है। हिमालय की उत्तरी तलहटी से लेकर दक्षिण तटीय भूमि तक, आस्था, आध्यात्मिकता और धार्मिक नैतिकता सदैव भारत के विभिन्न पवित्र शहरों में संचित होती रही है। आज हम आपको हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुरूप उन सात परम अलौकिक भारतीय शहरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां ईश्वरीय शक्ति बसती है।

1. द्वारका

द्वारका सर्वोपरि हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक है। हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक इस शहर को भगवान कृष्ण ने बसाया था। माना जाता है कि गोमती नदी के तट पर स्थित यह शहर कालान्तर में अरब सागर में डूब गया था। इसके अवशेष अब भी भारत के इस हिस्से में देखे जा सकते हैं।

इस प्राचीन शहर में समय के साथ कई बदलाव आए हैं, लेकिन अभी भी यहां कई कालानुक्रमिक स्मारक हैं, जो यहां हुई ऐतिहासिक घटनाओं के साक्षी हैं। द्वारका में प्रमुख पवित्र स्थलों में बेट द्वारका, द्वारकाधीश मंदिर, गायत्री मंदिर शामिल है।

2. अयोध्या

राम की जन्म-भूमि के रूप में विख्यात अयोध्या एक प्राचीन शहर है, जो सरयू नदी के तट पर स्थित है। अयोध्या हिंदू राज्य कोशल की राजधानी थी। ऐसा वर्णित है कि इसे देवताओं ने स्वर्ग की भांति ही बनाया था। भगवान राम की यह जन्मभूमि जीवन में लोभ, अहंकार और ईर्ष्या को त्याग कर जीने का उपदेश देती है।

अयोध्या को आध्यात्मिक आनंद और मोक्ष प्राप्ति का स्थल भी माना जाता है। देश में अगर कहीं भी सबसे प्राचीन मंदिर हैं, तो वे अयोध्या नगरी में ही हैं। चक्रवर्ती महाराज दशरथ महल, नागेश्वर नाथ मंदिर, हनुमान गढ़ी, रामकोट और कनक भवन जैसे कई उल्लेखनीय तीर्थ अयोध्या में स्थित हैं।

3. मथुरा

मथुरा को भगवान कृष्ण के जन्म स्थान के रूप में जाना जाता है। पौराणिक कथाओं मुताबिक मथुरा सुरसेन राज्य की राजधानी थी। प्राचीन शहर मथुरा को उसके घने जंगलों की वजह से माधवन भी कहा जाता है। मथुरा कई सदियों तक एक महत्वपूर्ण व्यापारिक नगरी रही थी।

यमुना नदी के किनारे बसा मथुरा शहर कृष्ण भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ है। मथुरा अपने ब्रज संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध है, जहां हर घाट में भगवान कृष्ण की एक विशिष्ट कथा निहित है।

4. हरिद्वार


हरिद्वार का शाब्दिक अर्थ है ‘हरि तक पहुँचने का द्वार’। हरिद्वार उन चार जगहों में से एक है, जहां समुद्र मंथन से प्राप्त किया गया अमृत गलती से गिर गया था। यही कारण है कि यहां हर 12 साल में कुम्भ मेला का आयोजन किया जाता है।

हर साल लाखों की संख्या में भक्त यहां पवित्र नदी गंगा में डुबकी मार अपने पापों के नाश और मोक्ष की तलाश में इस पवित्र भूमि में आते हैं। हरिद्वार में हर की पौड़ी, कनखल में स्थित घाट, मनसा देवी मंदिर और चंडी देवी मंदिर ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं।

5. वाराणसी

वाराणसी को बनारस या काशी भी कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे पुराने समकालीन शहरों में से एक है, जिसे भारत की धार्मिक राजधानी भी कहा जाता है। हिन्दू मान्यताओं में वाराणसी भगवान शिव की पसंदीदा नगरी के रूप में वर्णित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार वाराणसी का नाम दो नदियों वरुणा और असि के नाम पर पड़ा, क्योंकि यह शहर इन दो नदियों के मध्य में पड़ता है।

यहां लोग जीवन में कम से कम एक बार जाने और यहां से बह रही पवित्र गंगा में स्नान की कामना करते हैं। वाराणसी में कई मनोज्ञ घाट जैसे दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, पंचगंगा, हरिश्चंद्र घाट जैसे कई घाट हैं और इन घाटों का संबंध किसी न किसी धार्मिक या पौराणिक कथाओं से जुड़ा है।

6. कांचीपुरम

कांचीपुरम चेन्नई के निकट स्थित एक छोटा सा शहर है, जिसे ‘द गोल्डन सिटी ऑफ़ 1000 टेंपल’ भी कहा जाता है। कांचीपुरम अपने पल्लव और मणिमेकलाई के शिल्प चित्रण के लिए विख्यात है। कांचीपुरम वेगवती नदी के तट पर स्थित है, जो हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और ईसाई धर्म का उत्तम संघीकरण है।

मान्यताओं के मुताबिक कांचीपुरम शुरू से ही महत्त्वपूर्ण शहर रहा है। कांचीपुरम के प्रसिद्ध मंदिरों में कैलाशनाथ मंदिर, वरदराज मंदिर, एकमबारानाथर मंदिर, बैकुंठ पेरूमल मंदिर आदि प्रसिद्ध हैं।

7. उज्जैन

क्षिप्रा नदी के किनारे बसे उज्जैन को प्राचीन काल में उज्जयिनी भी कहा जाता था और यह अवंती राज्य की राजधानी हुआ करती थी। इस मशहूर एवं प्राचीन शहर में प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का वास है। हरिद्वार की तरह, उज्जैन में भी अमृत मंथन से जुडी कहानियां प्रचलित हैं।

एक लोकप्रिय पवित्र स्थल होने के अतिरिक्त, उज्जैन बौद्ध संस्कृति के पहलुओं को भी दर्शाता है। उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर, श्री बडे गणेश मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, महाकाल मंदिर आदि कई मंदिर पवित्र स्थलों के प्रमुख प्रारूप हैं।

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