आइए जानते हैं भारतीय करेन्सी से जुड़े 11 रोचक तथ्य

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5:55 pm 7 Dec, 2015

रुपए के बिना किसी का काम नहीं चलता। जिन्दगी में हर छोटे-बड़े काम के लिए रुपए की जरूरत होती है। हम रुपए के बेहद नजदीक होते हैं, इसके बावजूद अपनी करेन्सी के तथ्यों से अन्जान रहते हैं। अगर मैं आपसे कहूं कि नोट बनाने के लिए काग़ज़ का नही, बल्कि कॉटन का प्रयोग किया जाता है, तो क्या आप मानेंगे? भारतीय करेन्सी से जुड़े हुए ऐसे कई मजेदार और रोचक तथ्य हैं, जिन्हें जानकर आप आश्चर्यचकित रह जाएंगे।

1. पेपर करेन्सी जारी करने की प्रक्रिया 18वीं सदी में शुरू हुई थी। सबसे पहले बैंक ऑफ हिन्दुस्तान, बैंक ऑफ बंबई, बैंक ऑफ बंगाल और बैंक ऑफ मद्रास जैसे निजी बैंक पेपर करेन्सी को मुद्रित करते थे।

 

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2. वर्ष 1938 में भारतीय रिजर्व बैंक ने 10,000 और 5000 रुपए के नोट भी जारी किए थे, जिसे वर्ष 1978 में बन्द कर दिया गया।

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3. आजादी के बाद भी पाकिस्तान, भारतीय नोटों का इस्तेमाल पाकिस्तानी मुहर लगा कर करता था, जब तक कि वह खुद पर्याप्त मात्रा में प्रिंट करने की स्थिति में नही आ गया।

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4. एक रुपए के नोट को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है और इन पर सचिव के हस्ताक्षर होते हैं।

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5. हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 15 अन्य भाषाएं एक नोट पर लिखी रहती हैं।

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6. अगर आपके पास किसी भी फटे नोट का 51% से अधिक का हिस्सा है, तो आप उसे  बैंक ले जाकर बदल सकते हैं।

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7. सुरक्षा कारणों की वजह से आपको एक नोट के नंबर पैनल में आइ, जे, ओ, एक्स, वाइ, ज़ेड अक्षर नही मिलेंगे।

 

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8. रुपए के चिह्न को बनाया था डॉ. उदय कुमार ने। इसे 2010 में मान्यता मिल गई।

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9. सभी नोटों में ज़रूर कुछ भारतीय स्थानों को दिखाया जाता है। जैसे 20 रुपए के नोट में अंडमान द्वीप समूह को दिखाया गया है।

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10.  एक १० रुपए के सिक्के को बनाने में लागत आती है 6.10 रुपए की।

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11. नोटों की छपाई नासिक, देवास, मैसूर और सालबोनी के प्रिंटिंग प्रेस में होती है। जबकि मुंबई, नोएडा, कोलकाता और हैदराबाद में सिक्कों की ढलाई होती है।

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