अपनी पेंशन से 1100 से अधिक गड्ढे भर चुके हैं गंगाधर; सड़क हादसों पर रोक लगाना है लक्ष्य

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5:35 pm 15 Mar, 2016


वह हर सुबह अपनी कार लेकर हैदराबाद की सड़कों पर निकलते हैं। सिर्फ़ गड्ढों की मरम्मत के लिए। अभी तक वह 1100 से अधिक गड्ढे भर चुके हैं और इस प्रक्रिया में हर बार अपनी पेंशन का सहारा लेते हैं। कहावत तो सुनी थी कि ठोकर लगने पर रास्ते में पड़े पत्थर को कोसने से बेहतर है कि उस पत्थर को हटा दो।

आज वह व्यक्ति भी मिल गया, जो असल ज़िंदगी में भी इसे आज़माता है। 67 वर्षीय गंगाधर तिलक कटनम एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी है।

लेकिन गंगाधर आम लोगों से अलग हैं। उनके इरादे कुछ और हैं। वह एक मिशन पर हैं, जिसमें उनका कोई स्वार्थ नहीं है। वह चाहते हैं कि देश के हर गड्ढे को भर दें, जो ख़तरनाक हैं। वह रोज कार निकालते हैं और जहां कहीं भी सड़कों पर उन्हें गड्ढा दिखता हैं, तो सुनिश्चित करते हैं कि वह उन्हें भर देंगे।

उनकी कार में बोरियां होती हैं, जो सड़क की मरम्मत में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों से भरी होती हैं। शुरुआत में वह ऐसी 5 बोरियां लेकर निकलते थे, लेकिन अब इसकी संख्या 9 से 10 के बीच पहुंच गई हैं।

गंगाधर पहले रास्तों में पड़ी बजरी भर लाते थे, लेकिन जब उन्हें यह महसूस हुआ कि इतनी मात्रा काफ़ी नही है, तो उन्होंने ठेकेदारों से खरीदना शुरु कर दिया। यह उनका समर्पण ही हैं कि उनके इस प्रयास से कहीं न कहीं हैदराबाद की सड़कें यात्रियों के लिए सुरक्षित हैं।

गंगाधर अपने इस मिशन के शुरुआत किए जाने के को लेकर कहते हैंः

“एक दिन, मैं अपनी कार चला रहा था, तभी मेरी कार एक कीचड़ भरे गड्ढे से गुज़री, जिसकी वजह से सड़क के किनारे खेल रहे बच्चों के कपड़े गंदे हो गए। मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। मैने 5 हजार रुपए उस गड्ढे को भरने के इस्तेमाल में आने वाली सामग्री के लिए खर्च किए और उसे भर दिया। तब से यह सिलसिला रुका नहीं।”

तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब तक 1,125 से ज्यादा गड्ढे भरे जा चुके हैं। ढाई साल तक तो उन्होंने ये गड्ढे अकेले दम पर और अपने खुद के पैसे से भरे हैं।

लेकिन अब बहुत से लोग और सॉफ्टवेयर इंजीनियर गंगाधर के इस ‘श्रमदान’ में शामिल हो रहे हैं। यही नहीं, जून 2012 से, जीएचएमसी (ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम) गंगाधर को बीटी मिक्स मटेरियल मुहैया करा रहा है।

गंगाधर ने सेवानिवृति के बाद एक इन्फोटेक कंपनी में अपनी सेवाएं प्रदान की। वह उन दिनों को याद करके बताते हैंः


“यह एक लत की तरह बन गया था। यहां तक कि जब मैं नौकरी कर रहा था, तो मैं लंच टाइम में ऑफिस छोड़ देता था और उस समय के दौरान एक पॉटहोल की मरम्मत करके वापस आ जाता था।”

नौकरी के दौरान गंगाधर ज्यादा समय अपने मिशन को समर्पित करने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होने नौकरी छोड़ दी और अपने मिशन पर पूरी तरह लग गए।

गंगाधर को सड़क पर काम करते देखकर कोई भी मदद करने के लिए आगे नहीं आता था, लेकिन सरकार और नागरिकों द्वारा मदद न मिलने के बावजूद वे कभी इरादों से पीछे नही हटें।

“मैने दो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं देखी, जिसके बाद गड्ढे भरने के बारे में और अधिक गंभीर हो गया। जब मैने देखा एक बाइक सवार गड्ढे की वजह से ऐक्सिडन्ट में अपने दोनो हाथ गंवा बैठा। दूसरी घटना में एक ऑटो की बस से भिड़ंत हो गई, जिसकी वजह से दोनों ऑटो में बैठे यात्रियों को काफ़ी चोटें आई थीं। दोनों घटनाओं की वजह सड़क पर पड़े गड्ढे ही थे।”

लेकिन गंगाधर के लिए यह कार्य इतना आसान नही था। उनकी पत्नी, जो गंगाधर के इस श्रमदान से खुश नहीं थी, ने अपने बेटे रवि को गंगाधर को रोकने के लिए अमेरिका से बुला लिया था। लेकिन जब रवि को एहसास हुआ कि यह काम कितना ज़रूरी है, तो वह आर्थिक रूप से अपने पिता की मदद करने लगा। यही नहीं, रवि ने अपने पिता गंगाधर के लिए एक ऐसा ऐप भी बनाया, जो लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इस ऐप का उपयोग कर लोग उन स्थानों की जानकारी दे सकते हैं, जहां गड्ढे हैं।

गंगाधर किसी भी प्रकार का दान या धन स्वीकार नहीं करते। और हैरानी की बात यह भी है कि आजतक इस काम के लिए उन्होंने कोई कर्मचारी नहीं रखा है। उनका यह काम पूरी तरह उनके संकल्प पर चलता है।

“मैं चाहता हूं कि सरकार जल्दी ही गड्ढों पर विचार करे और काम करे, क्योंकि गड्ढे बहुत खतरनाक होते हैं। रोज गड्ढे भरने के लिए हैदराबाद में जीएचएमसी 30 ट्रक बीटी मिश्रण सामग्री इस्तेमाल करता है। अगर इन सामग्रियों के उपयोग में पारदर्शिता बरती जाए, तो सड़कों पर गड्ढे नहीं मिलेंगे। यह समस्या अन्य शहर और कस्बे में भी हो सकती है।”

गंगाधर का यह अद्भुत काम निश्चित रूप से हमें एक आम आदमी की शक्ति पर जश्न मनाने का कारण दे सकता है।

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