भारत में हिंदी मीडियम से की पढ़ाई, अब है ओबामा सरकार की काउंसलर

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2:35 pm 18 Jan, 2016

कहते है मेहनत और लगन का फल मीठा होता है। रेणु खटोड़ एक ऐसा ही नाम है जिन्होंने अपनी लगन के बलबूते अपनी कामयाबी की इबारत लिखी। रेणु ओबामा सरकार की शिक्षा और विदेशी मामलों की सलाहकार परिषद में बतौर काउंसलर शामिल है।

फर्रुखाबाद के एक व्यवसायी परिवार में जन्मी रेणु का यह सफर इतना आसान नहीं था। महज़ 19 साल की उम्र में उनकी शादी ग्वालियर के रहने वाले डॉ.सुरेश खटोड़ से हो गई। शादी के बाद वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थी, जिसके लिए उनके ससुराल वालों ने रेणु को कभी मना नहीं किया।

Renu Khator and Suresh khator

ससुरालवालों ने रेणु को अमेरिका में नौकरी कर रहे बेटे के साथ उसकी गृहस्थी संभालने के लिए उन्हें अमेरिका भेज दिया। यहीं से शुरू होती है रेणु के संघर्ष की दास्तां कि किस तरह से अपने सपनों को उन्होंने अपनी आखों में सजा के रखा और उसे सही मुकाम भी दिया।

इस पूरी कड़ी में रेणु के पति डॉ. सुरेश ने उनका साथ और उनकी शिक्षा को लेकर उन्हें प्रोत्साहन दिया। लेकिन रेणु के सामने जो सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी थी वो थी हिंदी मीडियम से उनकी पढ़ाई, जिसके चलते किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलना मुश्किल था। लेकिन भाषा की यह फ़ांस भी रेणु के इरादों को हिला न सकी।


रेणु के सामने फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने और लिखने की चुनौती थी। रेणु ने अपनी हिम्मत को बांधे रखा और उनके पति ने भी उनका हर कदम पर साथ दिया। रेणु अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ बनाने के लिए दिन-रात अमेरिकी टीवी टॉक शो देखा करती थी।

इसी के साथ टॉक शो के एंकर्स की तरह बोलने का अभ्यास किया करती थी। यह सिलसिला चलता रहा और रेणु के लिए धीरे-धीरे सब आसान होता चला गया। इसके बाद रेणु ने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा।

1975 में रेणु ने अमेरिका की पुदुरू यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन और फिर PhD की डिग्री हासिल की। 1985 में रेणु ने फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी से अपने करियर की शुरुआत की।

2008 में ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी में चांसलर के पद के लिए उन्होंने आवेदन किया। इंटरव्यू देते वक़्त रेणु ने यूनिवर्सिटी की रैंकिंग को बढ़ाने का एक बेहतरीन प्लान सामने रखा, जिससे प्रभावित होकर रेणु को यूनिवर्सिटी की चांसलर और प्रेसिडेंट पद के लिए नियुक्त कर दिया गया।

इस पद को संभालते ही उन्हें अपने बताए गए प्लान को कागज़ से हकीकत में तब्दील करने की चुनौती दे दी गई। रेणु ने इस चुनौती को स्वीकारते हुए इसे पूरा भी किया। इसके साथ ही बीते साल रेणु को काउंसलर के रूप में अमेरिका की शिक्षा और विदेशी मामलों की सलाहकार परिषद में शामिल कर लिया गया।

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