रियल लाइफ हीरो नाना पाटेकर से जुड़े 14 बेहतरीन फैक्ट्स

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4:11 pm 2 Jan, 2016

बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन कलाकारों में शुमार नाना पाटेकर आज 65 साल के हो गए हैं। एक अभिनेता के रूप में नाना पाटेकर की पहचान एक ख़ास तरह के “एंग्री यंगमैन” के रूप में है जो अमिताभ और मिथुन चक्रवर्ती से बिलकुल अलग है। विलेन,  लीड, कॉमिक हर तरह के कैरेक्टर में अपनी श्रेष्ठता की छाप छोड़ने वाले नाना पाटेकर उर्फ़ विश्वनाथ पाटेकर का जीवन विविध आयामों से भरा पड़ा है। आज हम आपको रूबरू करायेंगे नाना के जीवन से जुड़े बेहतरीन फैक्ट्स से जो उन्हें रियल लाइफ हीरो बनाते हैं

1. नाना पाटेकर एक कलाकार घराने से ताल्लुकात रखते हैं। उनके पिता श्री दनकर पाटेकर एक विख्यात पेंटर थे।

नाना भी पेंटिंग से खासा लगाव रखते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं की नाना एक शानदार ‘स्केच आर्टिस्ट’ भी हैं।

2. साल 1986 में रिलीज हुई अग्नि-साक्षी फिल्म में एक सनकी पति के रोल से आलोचकों की प्रशंसा लूटने वाले नाना की वैवाहिक जिंदगी भी काफी उठापठक भरी रही है।

नाना ने थियेटर एक्ट्रेस ‘नीलकंती’ से विवाह किया जो सफल नहीं रहा और अंततया दोनों ने आपसी रजामंदी से तलाक ले लिया। हालाँकि नाना तलाक की खबरों का खंडन करते रहे हैं।

3. नाना पाटेकर म्यूजिक मुख्यतया गायन में काफी रूचि रखते हैं।

अपनी फिल्म यशवंत(1997),वजूद (1998) और आँच(2003) में उन्होंने गाने भी गाये हैं।

4. अपने ब्राश टाइप डायलॉग के लिए नाना पाटेकर खासे लोकप्रिय हैं।

शायद इसी शैली के कारण वो पूरी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे गंभीर अभिनेता के रूप में जाने जाते हैं।

 

5. फिल्मों में आने से पूर्व नाना थियेटर के कलाकार थे।

1978 में अपनी पहली फिल्म ‘गबन’ में वे स्मिता पाटिल के साथ पहली बार रुपहले परदे पर नजर आये।

6. नाना पाटेकर अपने काम के प्रति खासे गंभीर और ईमानदार माने जाते हैं।


निर्देशक के रूप में कैरियर की पहली फिल्म ‘प्रहार’ में परफेक्शन के लिए नाना ने भारतीय सेना में तीन महीने के कड़ी ट्रेनिंग ली।

7. इसी दौरान सेना ने उन्हें ‘कैप्टन’ की उपाधि से सम्मानित भी किया।

नाना ‘कोहराम’ और ‘प्रहार’ जैसी फिल्मों में फ़ौजी की भूमिका भी निभा चुके हैं।

8. अपने 37 साल के शानदार करियर में क्रांतिवीर,परिंदा और अग्निसाक्षी के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीते।

साल 2006 में खलनायक के रूप में फिल्म ‘अपहरण’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्रदान किया गया।

9. नाना इंडस्ट्री में भाई-भतीजेवाद के कभी पक्षधर नहीं रहे।

स्वयं अपने पुत्र ‘मल्हार पाटेकर’ को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने में उन्होंने कोई मदद नहीं की।

10. बगैर लाग-लपेट के शांत और सरल जीवन जीने वाले नाना मुंबई की तुलना में अपने गाँव में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

11. आम-तौर पर नाना को समाज में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों,बच्चों और किसानों के लिए काम करते देखा जा सकता है।

पिछले साल सितम्बर में सूखे से पीड़ित 180 किसानों को नाना ने व्यक्तिगत रूप से 15-15 हजार की धनराशि वितरित की।

12. इस प्रयास को समाज से जोड़ने के लिए नाना ने मराठी अभिनेता मकरंद अंशकुरे के साथ ‘नाम फाउंडेशन’ नामक NGO की शुरुआत की है।

यह स्वयंसेवी संगठन किसानों के वेलफेयर के लिए काम करता है.किसानो को खेती के नयी तकनीक और आर्थिक सहायता प्रदान करना इस NGO का उद्देश्य है।

13. नाना फिक्शन वर्ल्ड में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं।

दूरदर्शन की शानदार कॉमिक सीरीज ‘जंगल बुक’ में शेरखान के किरदार को नाना ने अपनी आवाज से कामयाब बनाया।

14. फिल्म पाठशाला में प्रिन्सिपल का किरदार निभाने वाले नाना ने अपनी पूरी फीस को बच्चों के 5 NGO को डोनेट कर दिया।

नाना को उनके सशक्त अभिनय के कारण 26 जनवरी 2013 को प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया।

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