राहुल गांधी बन सकते हैं कांग्रेस अध्यक्ष, ताजपोशी अगले महीनेः रिपोर्ट

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6:04 pm 1 Jun, 2016


लंबे समय से राहुल गांधी के हाथ कांग्रेस पार्टी की कमान देने की अटकलें लगाई जाती रही हैं। अब इन अटकलों पर विराम लग सकता है। यही नहीं, उनकी ताजपोशी के बाद कांग्रेस पार्टी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों का हवाला देते हुए बताया गया है कि जल्दी ही राहुल गांधी की ताजपोशी बतौर कांग्रेस अध्यक्ष हो सकती है। हाल के चुनावी पराजय की जिम्मेदारी जिस तरह राहुल गांधी ने ली है, उससे साफ संकेत जाता है कि वे बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं।

इस संबंध में कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों कमलनाथ और दिग्जविजय सिंह सरीखे वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में व्यापक बदलाव की जरूरत पर बल दिया था।

वहीं, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा था कि राहुल गांधी को अब कमान सौंप देनी चाहिए। शकील अहमद ने भी खुले तौर पर मांग की थी कि राहुल को कांग्रेस का नेता बनाया जाना चाहिए।

राहुल की टीम में युवा चेहरे !

राहुल गांधी की टीम में युवा चेहरे दिखेंगे। इस टीम में सचिन पायलट, आरपीएन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, अजय माकन और कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का नाम शामिल है।

रणनीति बदलेगी कांग्रेस ?

माना जा रहा है कि असम में भारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी अपनी रणनीति बदल सकती है। पिछले एक दशक से भी अधिक समय में कांग्रेस पार्टी मुस्लिम हितैषी दिखी है।


हालांकि, पार्टी को इस रणनीति का लाभ असम में नहीं मिल सका है। यहां हुए विधानसभा चुनावों में बदरुद्दीन अजमल ने मुस्लिम वोटों पर अपनी पकड़ ढीली नहीं पड़ने दी और इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल गया।

पार्टी मानती है कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में असम जैसा हाल हो सकता है। गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी के उम्मीदवार खड़ा करने की घोषणा कर चुके हैं। कांग्रेस पार्टी को इससे सीधा नुकसान दिख रहा है।

चिन्तन शिविर या चिन्ता शिविर ?

राजनीतिक जानकारों की अगर मानें तो राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर आसीन करने के तुरंत बाद पार्टी चिन्तन शिविर का आयोजन कर सकती है। इस शिविर में कांग्रेस और सहयोगियों के बीच संबंध पर भी चर्चा की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के चुनाव विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम होने जा रहे हैं। जहां तक कांग्रेस की बात है, तो पार्टी के लिए आगामी चुनाव जीवन-मरण का प्रश्न बनने जा रहा है।

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