अब चुनाव सुधारों पर बोले राष्ट्रपति, पीएम मोदी के ‘एक देश एक चुनाव’ के विचार का समर्थन

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9:54 am 6 Sep, 2016


‘एक देश एक चुनाव’ के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचार को अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का समर्थन मिल गया है।

राष्ट्रपति ने कहा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले चुनावों की निरंतरता कम होनी चाहिए, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिरता कम हो सके।

दरअसल, राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी सोमवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर सरकारी स्‍कूल में एक विशेष क्‍लास लेने के दौरान बच्चों को संबोधित कर रहे थे।

इसी दौरान वह लोकसभा के साथ-साथ राज्‍यों के विधानसभा चुनावों की वकालत करते हुए दिखे।

इस अवसर पर 11वीं की छात्रा ने राष्‍ट्रपति से चुनाव में खर्च का हवाला देते हुए पूछा कि क्‍या एक साथ देश में सभी चुनाव कराया जाना अच्‍छा होगा तो इसका जवाब देते हुए राष्‍ट्रपति मुखर्जी ने कहाः ”चुनाव आयोग भी इस दिशा में किए जाने वाले प्रयासों के बारे में अपने विचार रख सकता है और यह बहुत लाभकारी होगा।”


गौरतलब है कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाने की वक़ालत की थी। प्रधानमंत्री का तर्क है कि इससे प्रत्येक वर्ष चुनावों में खर्च होने वाली अपार धनराशि की बचत होगी।

जून महीने में चुनाव आयोग ने भी इस विचार का समर्थन करते हुए कहा था कि राजनीतिक आम सहमति बनने की स्थिति में इस विचार को मूर्त रूप देना संभव हो सकेगा।

यही नहीं, पिछले साल दिसंबर में कार्मिक, न्याय और क़ानून मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में भी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ करवाने की वकालत की थी।

केन्द्र व राज्यों के चुनाव एक साथ कराए जाने के प्रधानमंत्री के विचार का राष्ट्रपति द्वारा समर्थन किए जाने से इस मुद्दे पर देश में एक नई बहस की शुरुआत स्वभाविक है।

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